कौन हैं भारत में आम की 21 लाख गुठलियां इकट्ठी कर के क्रांति लाने वाले Gutliman, जिस पर बन चुकी है फिल्म

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कौन हैं भारत में आम की 21 लाख गुठलियां इकट्ठी कर के क्रांति लाने वाले Gutliman

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‘Gutliman’ ऑफ़ इंडिया के नाम से जाने जाने वाला यह शख्स अब तक 21 लाख आम की गुठलियां इकट्ठा कर चुका है. वहीं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ने इन पर ‘Gutliman’ नाम की एक फिल्म भी बनाई है. क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी और वजह? पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

दिल्ली: यह कहानी है एक ऐसे शख्स की जो था तो एक डॉक्टर लेकिन फिर उसे पूरी दुनिया ने ‘Gutliman’ के नाम से जाना शुरू किया. दरअसल, इस शख्स का नाम डॉ. जसमीत सिंह है जो की एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं लेकिन 2016 में उन्होंने एक ऐसी क्रांति की शुरुआत की थी जिसके बाद उन्हें लोग Gutliman के नाम से जानने लगे. क्या है इनकी पूरी कहानी आइए आपको आगे विस्तार से बताते हैं.

डॉ. जसमीत ने बताया कि वह अभी तक लगभग 21 लाख आम की गुठलियां इकट्ठा कर चुके हैं, जिससे वह 8 लाख के करीब छोटे पौधे बना कर बांट चुके हैं. जब हमने उनसे इसके पीछे का कारण पूछा तो उनका कहना था कि जिस तरह से भारत में लगातार हरियाली खत्म हो रही है और पॉल्यूशन फैल रहा है. उसे देखते हुए उन्होंने इस क्रांति की शुरुआत की थी, जिसमें उन्होंने देश भर से और दुनिया भर के लोगों से सोशल मीडिया के माध्यम से अपील की थी कि वह उन्हें आम की गुठलियां भेजें. जब भी लोग आम खाए तो उसके बाद आम की गुठली को साफ करके सुखाकर उन्हें उनके पते पर गुठली भेज दें.

उनका आगे कहना था कि इसके बाद वह उन गुठलियों से एक छोटा पौधा बनाकर किसानों में बांटते हैं ताकि किसान उसे लगा सके. वह किसानों को यह ज्यादातर पौधे इसलिए बांटते हैं क्योंकि किसानों को बेहद अच्छी तरह से पता होता है कि पौधों को कैसे बड़ा करना है. वही उनका कहना था कि इससे हरियाली भी होती है और किसानों का फायदा भी होता है.

आम का पेड़ चुनने के पीछे का कारण
डॉ. जसमीत ने कहा कि वह आम की गुठलियां इसलिए मांगते हैं ताकि वह उसे एक छोटा आम का पेड़ आकार किसानों को दे सके. उन्होंने आम का पेड़ इसलिए चुना, क्योंकि आम का पेड़ पूरे वर्ष हरा रहता है और वह काफी बड़ा होता है और वह कभी भी आसानी से ना टूटता है और ना ही मुरझाता है. आम के पेड़ के ऊपर तरह-तरह के पक्षी भी आते हैं और आम का पेड़ इतना बड़ा होता है कि वह काफी हरियाली देता है और हवा में काफी शुद्धता भी पैदा करता है. आम के पेड़ के साथ सिर्फ मुश्किल यही है कि वह बड़ा होने में करीब 15 साल का समय लगता है. लेकिन यदि अगर वह एक बार बड़ा हो जाए तो वह सबसे ज्यादा वातावरण के लिए फायदेमंद होता है.

क्रांति लाने के बाद Gutliman नाम से बनी फिल्म
डॉ. जसमीत ने बताया कि उन्होंने 2016 में काम करना शुरू किया था, लेकिन 2022 में उनकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. जिसके बाद दुनिया भर में लोगों ने उनको जानना शुरू किया और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के कई संस्थाओं ने उनके साथ काम करने के लिए इच्छा भी जताई. वहीं उनका यह भी कहना था कि उसके बाद भारत में भी उन्हें लोगों ने खूब प्यार दिया और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट द्वारा उनके ऊपर Gutliman नाम की एक फिल्म भी बनाई गई.

यह फिल्म अब एक जलवायु कार्यों के मॉडल के रूप में अमेरिका, कनाडा और कई अन्य देशों के फिल्म फेस्टिवल्स समारोहों में दिखाई जा रही है. वह अभी भी कहीं और आम के पेड़ लगाना चाहते हैं जिसमें उन्हें सभी लोगों की मदद चाहिए और वह सबसे यह अपील करते हैं कि जब भी कोई भी आम खाए तो वह गुठली उन्हें उनके पते पर पार्सल कर दे. उनका कहना था कि उनका पता जानने के लिए लोग उन्हें उनके इंस्टाग्राम Gutliman, जसमीत सिंह से संपर्क कर सकते हैं और उनके नंबर पर जो की 9831459390 है, इस पर संपर्क भी कर सकते हैं.

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Mohd Majid

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