नोएडा (होरोला/बंजारा चौक): रूस-यूक्रेन के बाद अब मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर आपके चूल्हे तक पहुंच गया है. नोएडा के होरोला और सेक्टर 8 स्थित बंजारा चौक के बाजारों में कोयले और लकड़ी की मांग में अचानक भारी उछाल आया है. घरेलू इस्तेमाल के साथ-साथ ढाबों और रेस्टोरेंट्स में चूल्हे का प्रयोग बढ़ने से ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं. हालात यह हैं कि पिछले कुछ दिनों में कोयले और लकड़ी की कीमतों में ₹10 से ₹20 प्रति किलो तक का इजाफा देखा गया है.
₹28 वाला कोयला पहुंचा ₹40 के पार
कोयला विक्रेता दिनेश ने बताया कि पिछले कुछ समय में कोयले की खपत 1.5 टन से बढ़कर 2 टन प्रतिदिन तक पहुंच गई है. जो कोयला पहले ₹28 प्रति किलो बिकता था, उसकी कीमत अब ₹35 से ₹40 तक जा पहुंची है. रेस्टोरेंट और ढाबों में गैस के मुकाबले कोयले के चूल्हे का इस्तेमाल बढ़ने से सप्लाई चेन पर दबाव साफ दिख रहा है.
लकड़ी की कमी और बढ़ता किराया बना मुसीबत
लकड़ी विक्रेता आयशा के मुताबिक लकड़ी की मांग जितनी बढ़ी है,उतनी ही उसकी किल्लत होने का डर सता रहा है. उन्होंने बताया कि दूर-दराज के इलाकों से लकड़ी लाने में अब ₹5,000 से ₹6,000 तक का अतिरिक्त किराया खर्च करना पड़ रहा है. यही वजह है कि ₹10 प्रति किलो वाली लकड़ी अब ₹15 से ₹20 में मिल रही है. पीछे से माल कम आने और बढ़ती डिमांड के कारण भविष्य में सप्लाई बंद होने का भी खतरा बना हुआ है.
आधा खाना गैस तो आधा चूल्हे पर
बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और मिडिल क्लास परिवारों पर पड़ा है. स्थानीय महिलाओं का कहना है कि वे अब खर्च कम करने के लिए आधा खाना गैस पर और आधा चूल्हे पर बना रही हैं. लेकिन अब चूल्हा जलाना भी सस्ता नहीं रहा क्योंकि लकड़ी और कोयला खरीदने के लिए अब जेब पहले से ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है.
सवाल-जवाब
नोएडा के किन इलाकों में लकड़ी और कोयले के दाम बढ़े हैं?
नोएडा के होरोला और सेक्टर 8 बंजारा चौक स्थित कोयला और लकड़ी की टालों पर दामों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है.
कोयले और लकड़ी की कीमतों में कितना इजाफा हुआ है?
कोयले के दाम ₹28 से बढ़कर ₹35-40 हो गए हैं, वहीं लकड़ी के दाम ₹10 से बढ़कर ₹15-20 प्रति किलो तक पहुँच गए हैं.
इस महंगाई का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
विक्रेताओं के अनुसार, मिडिल ईस्ट में युद्ध के असर, बढ़ती ट्रांसपोर्टेशन लागत और पीछे से होने वाली शॉर्टेज के कारण दाम बढ़े हैं.
लकड़ी की शॉर्टेज का डर क्यों बना हुआ है?
सूखा पेड़ काटना प्रतिबंधित है और बारिश के कारण सूखी लकड़ी मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि मांग लगातार बढ़ती जा रही है.
