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Ghaziabad: नोएडा के सेक्टर-94 में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. दरअसल एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्र हर्षित भट्ट की एक गहरे पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई. वह अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गया था, तभी अचानक हादसा हो गया. बताया जा रहा है कि गड्ढा काफी गहरा था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे.
गाजियाबाद: नोएडा के सेक्टर-94 में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोरकर रख दिया है. गाजियाबाद इंदिरापुरम निवासी और एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्र हर्षित भट्ट की एक गहरे पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई. वह अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गया था, तभी अचानक हादसा हो गया. बताया जा रहा है कि गड्ढा करीब 70 से 80 फीट गहरा था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे. इस घटना के बाद प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं परिजनों ने इसे संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की है. इस हादसे के बाद गाजियाबाद की इंदिरापुरम के शिप्रा रिवेरा सोसाइटी में मातम पसरा हुआ है. सोसाइटी के निवासियों का कहना है कि सिस्टम की लापरवाही से एक घर का चिराग बुझ गया है.
घर में पसरा मातम, सिस्टम की लापरवाही
गाजियाबाद के इंदिरापुरम की शिप्रा रिवेरा सोसाइटी के 42-सी फ्लैट में रहने वाले हर्षित भट्ट की मौत की खबर जैसे ही लोगों तक पहुंची, हर आंख नम हो गई. सोसाइटी निवासी अनुज त्यागी ने बताया कि हर्षित बेहद होनहार, जिम्मेदार और अपने परिवार का सहारा था. घर का बड़ा बेटा होने के नाते उसकी जिम्मेदारियां भी बड़ी थीं. उसके पिता देश की सेवा में लेह-लद्दाख में तैनात हैं, मां गृहिणी हैं और छोटी बहन अभी पढ़ाई कर रही है. ऐसे में हर्षित की असमय मौत ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है.
हादसे को लेकर सोसाइटी के लोगों में गहरा आक्रोश है. लोगों का कहना है कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे. इतना बड़ा और गहरा गड्ढा पानी से भरा हुआ था, लेकिन न तो वहां बैरिकेडिंग की गई थी और न ही किसी तरह की चेतावनी या सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था थी. यह लापरवाही सीधे तौर पर सिस्टम और प्रशासन की अनदेखी को दर्शाती है. लोगों का सवाल है कि आखिर इतने खतरनाक स्थान को यूं ही खुला कैसे छोड़ दिया गया.
सिस्टम की अनदेखी का शिकार हुआ हर्षित
सोसाइटी निवासी हेमंत बाजपेई ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी ऐसी लापरवाहियों के कारण हादसे हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि एक 22 साल का युवा जो अपने सपनों और परिवार की उम्मीदों को लेकर आगे बढ़ रहा था, आज सिस्टम की अनदेखी का शिकार हो गया. हादसे के बाद रेस्क्यू टीम के देर से पहुंचने पर भी सवाल उठ रहे हैं. अगर समय पर मदद मिलती, तो शायद हर्षित की जान बचाई जा सकती थी.
हर्षित के परिवार का कहना है कि उसे तैरना भी आता था. ऐसे में उसका इस तरह डूब जाना कई सवाल खड़े करता है. घटना के बाद से सोसाइटी में मातम पसरा हुआ है.लोगों का आना-जाना लगातार जारी है और हर कोई इस दुखद घटना से स्तब्ध है. अब सभी की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जो भी जिम्मेदार हों, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और घर का चिराग इस तरह न बुझ पाए.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
