Public Opinion: जात चाहिए या विकास? विधायक कमीशन से कर रहा मोटी कमाई! जातीय रंगों में चुनावी लड़ाई हुई दिलचस्प

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Tarari Upchunav 2024: बिहार में चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 13 नवंबर को होने वाला है. उसमें तरारी विधानसभा काफी चर्चा में है. उपचुनाव में हर बार की तरह इस बार भी तरारी विधानसभा की लड़ाई जातीय रंगों में बढ़ते हुए दिखाई दे रही है.

भोजपुर. बिहार में चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 13 नवंबर को होने वाला है. ऐसे में जहां पार्टी और प्रत्याशी पूरी तैयारी में लगे हैं तो दूसरी तरफ आम वोटर भी अब अपना मन बनाने लगे हैं कि वोट किसको देना है. हालांकि, जब चुनाव नहीं होता है तो आम वोटर ऐसे प्रत्याशियों के बारे में बात करते हैं जो विकास कर सके और जात-पात से दूर रहने की चर्चा करते हैं. लेकिन जैसे ही चुनाव आता है वैसे ही धीरे-धीरे वोटरों की जमात अपनी-अपनी जातियों की ओर खींचने लगती है. ऐसा ही कुछ माहौल तरारी विधानसभा के उपचुनाव में भी अब सामने आ रहा है. लोकल 18 की टीम तरारी विधानसभा के वीपिनडीह गांव में ग्रामीणों से बात की और पूछा कि जात चाहिए या विकास. किस आधार पर यहां के ग्रामीण प्रत्याशियों का चयन करेंगे, जिसमें लोगों की अलग-अलग राय सामने आई.

बता दें कि तरारी उपचुनाव में एक तरफ जहां भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चार बार के विधायक रहे सुनील पांडे के पुत्र विशाल प्रशांत मैदान में हैं वहीं, दूसरी तरफ महागठबंधन ने राजू यादव को उतारा है. हर बार की तरह इस बार भी तरारी विधानसभा की लड़ाई जातीय रंगों में बढ़ते हुए दिखाई दे रही है. विपिनडीह गांव में कुछ ग्रामीणों ने बताया कि इस बार तरारी विधानसभा से विकास करने वाले प्रत्याशियों को हम लोग अपना वोट देकर विधानसभा भेजेंगे. जबकि कुछ लोगों का कहना है कि जात भी मतदान के दिन हावी रहेगी. हालांकि, जाति की बात को लेकर लोग ऑन कैमरा खुलकर नहीं बोले लेकिन ऑफ कैमरा खुलेआम बोल रहे हैं कि माले और बीजेपी प्रत्याशियों के बीच जाति का मुद्दा अहम साबित होगा.

विधायक कमीशन के रूप में कर रहा मोटी कमाई
विपिनडीह गांव के युवा और सभी वर्ग के लोगों से जब बातचीत शुरू हुई तो दो प्रत्याशियों के बीच बात आ कर रुक गई. एक जो पूर्व विधायक रहे सुनील पांडेय, दूसरा निवर्तमान विधायक सुदामा प्रसाद. विपिनडीह गांव के लोगों ने बोला कि 9 साल से लगातार माले के विधायक सुदामा प्रसाद रहे हैं लेकिन उतना कम उनके द्वारा नहीं किया गया जितना वह विधायक रहते हुए कर सकते थे. इस गांव में भी कई सारे कार्य होने थे लेकिन सुदामा प्रसाद के द्वारा नहीं कराए गए, जबकि 2010 से 15 तक सुनील पांडे तरारी के विधायक थे. उस समय बहुत ज्यादा विकास कार्य हुए थे. खासकर ब्लॉक, स्वास्थ्य विभाग या अस्पतालों में होने वाले कमीशन से आम जनता बच जाती थी. उनके कार्यकाल में कोई भी कर्मचारी या दलाल कमीशन लेने से डरता था. लेकिन सुदामा प्रसाद जब से विधायक बने हैं तब से खुद उनके ही एजेंट हर जगह मौजूद रहते हैं और गरीबों से कमीशन के रूप में मोटी कमाई उन लोगों के द्वारा की जाती है. इस बार इस गांव के ग्रामीणों का विचार है कि पूर्व विधायक सुनील पांडे के बेटा विशाल प्रशांत को वोट दिया जाए और यहां का विधायक बनाया जाए.

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Mohd Majid

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