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Rashmika Mandanna Coorgi Saree Style: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने कोडगु में अपने वेडिंग रिसेप्शन होस्ट किया. खासबात ये रही की इस दिन रश्मिका का 30वां जन्मदिन भी था. इस खास मौके पर एक्ट्रेस ने ट्रेडिशनल कुर्गी स्टाइल साड़ी पहना, जिसमें वो बेहद ही खूबसूरत नजर आ रही हैं. देखें फोटोज.
जब रश्मिका मंदाना विजय देवरकोंडा के साथ अपने कोडागु रिसेप्शन के लिए बाहर निकलीं, तो सिर्फ उनकी खूबसूरत हरे और गुलाबी रंग की सिल्क साड़ी ही नहीं, बल्कि उसे पहनने का तरीका भी सबका ध्यान खींच रहा था. अपने ट्रेडिशन्स से जुड़ी हुई रश्मिका ने कूर्गी (कोडावा) साड़ी पहनने का तरीका चुना, जो उनके होम टाउन कोडागु (कूर्ग) से गहराई से जुड़ा हुआ है. (सभी फोटोज- रश्मिका मंदाना इंस्टाग्राम)
कूर्गी साड़ी पहनने का तरीका कोडागु की कोडवा समुदाय से आता है. अपनी मजबूत सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति से गहरे जुड़ाव के लिए मशहूर कोडवा लोगों ने इस खास पहनावे की शैली को पीढ़ियों से संभाल कर रखा है.
आम तौर पर साड़ी का पल्लू बाएं कंधे पर डालते हैं, लेकिन कूर्गी स्टाइल में यह परंपरा उलट जाती है. इसमें पल्लू दाएं कंधे पर लाया जाता है और अच्छे से फिक्स किया जाता है, जिससे साड़ी को एक सलीकेदार और आकर्षक लुक मिलता है.
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इस ड्रेस की सबसे खास बात इसकी प्लीट्स का डायरेक्शन है. आमतौर पर साड़ी की प्लीट्स एक ही डायरेक्शन में होती हैं, लेकिन कूर्गी स्टाइल में ये प्लीट्स उल्टी दिशा में गिरती हैं. यही छोटी सी बात इस लुक को तुरंत पहचानने लायक बना देती है.
यह पहली बार नहीं है जब रश्मिका मंदाना ने कूर्गी ड्रेस पहनी हो. उन्होंने कई मौकों पर इसे पहना है और हर बार इसमें अपना खास आधुनिक लेकिन पारंपरिक अंदाज जोड़ा है, जिससे यह पारंपरिक पहनावा ज्यादा लोगों तक पहुंचा है.
कूर्गी ड्रेप सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं है, बल्कि इसे आसानी से चलने-फिरने के लिए भी डिजाइन किया गया है. साड़ी को सलीके से लपेटने का तरीका यह सुनिश्चित करता है कि साड़ी अपनी जगह पर बनी रहे, जिससे यह रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ त्योहारों के लिए भी आरामदायक रहती है. यह खूबसूरती और उपयोगिता का बेहतरीन मेल है.
इस पहनावे की शैली से एक सुंदर कथा जुड़ी हुई है. माना जाता है कि यह देवी कावेरी से प्रेरित है, जिनका संबंध कावेरी नदी से है. कथा के अनुसार, जब देवी कावेरी नदी में परिवर्तित हुईं, तो पानी के तेज बहाव ने उनकी साड़ी की प्लीट्स को पीछे की ओर धकेल दिया. कहा जाता है कि इसी वजह से कूर्गी पहनावे में साड़ी की प्लीट्स उल्टी दिशा में होती हैं.
कोडावा समुदाय को ऐतिहासिक रूप से उनकी योद्धा परंपराओं के लिए जाना जाता है. यहां की महिलाएं साड़ी को इस तरह पहनती थीं कि वे आसानी से चल-फिर सकें, चाहे वे कॉफी के बागानों में काम कर रही हों या घर की जिम्मेदारियां संभाल रही हों, उन्हें किसी तरह की असुविधा महसूस नहीं होती थी. इसमें सुविधा सबसे जरूरी थी.
