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Arvind Kejriwal Vs Justice Swarana Kanta Sharma: दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से अरविंद केजरीवाल के उन वीडियोज को डिलीट कराने को कहा है,जिसमें वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जिरह करते नजर आ रहे हैं. आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने वीडियो शेयर किया था, जो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ है. जानें दिल्ली हाईकोर्ट ने अब उन वीडियोज को हटवाने के लिए क्यों कहा है…
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से सुनवाई से हटने की अपील की है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से जुड़ी कोर्ट कार्यवाही के वायरल वीडियो को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल की तरफ से कोर्ट में बहस के दौरान की गई वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाया जाए.
हाईकोर्ट के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा कि अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसका प्रसारण नियमों के खिलाफ है. दिल्ली हाईकोर्ट के ऑनलाइन सुनवाई से जुड़े नियम स्पष्ट रूप से अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और पब्लिश करने पर रोक लगाते हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्यों दिया आदेश?
अधिकारी के अनुसार, ऐसे वीडियो अपलोड करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि ‘सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वीडियो डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.’ उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी इस तरह के मामलों में हाईकोर्ट कदम उठाता रहा है और केजरीवाल का वीडियो भी उन्हीं मामलों में शामिल है जिन पर अदालत ने संज्ञान लिया है.
यह मामला दिल्ली की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें सीबीआई ने 2022 में एफआईआर दर्ज की थी. आरोप है कि इस नीति में हेरफेर कर शराब कारोबार में एकाधिकार और कार्टेलाइजेशन को बढ़ावा दिया गया, जिससे आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं को कथित तौर पर फायदा पहुंचा.
क्या है पूरा मामला?
हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को केजरीवाल समेत 22 आरोपियों को मामले से बरी कर दिया था और केस बंद कर दिया था. इसके खिलाफ CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई फिलहाल जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही हैं.
इस बीच, केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा से मामले से अलग होने की मांग करते हुए कहा कि उनके कुछ पुराने आदेश और केस की सुनवाई का तरीका पक्षपातपूर्ण प्रतीत होता है. वहीं CBI ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी सेमिनार में शामिल होना वैचारिक पक्षपात का प्रमाण नहीं है.
फिलहाल, अदालत की कार्यवाही के वीडियो वायरल होने के मामले में हाईकोर्ट का सख्त रुख यह साफ करता है कि न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा बनाए रखने को लेकर अदालत कोई ढील नहीं देना चाहती.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें
