'अपने तरीके से जनता से पैसे ऐंठ रहे हैं', स्मार्ट मीटर के मनमाने बिलों को लेकर फूटा आम जनता का गुस्सा

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Public Opinion: यूपी में स्मार्ट मीटर को लेकर राज्य सरकार ने फिलहाल पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. दरअसल प्रदेश के कई जिलों खासकर गाजियाबाद से लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल अचानक बढ़ गए हैं. आइए जानते हैं कि इसको लेकर आम जनता को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने फिलहाल पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. दरअसल प्रदेश के कई जिलों खासकर गाजियाबाद से लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल अचानक बढ़ गए हैं. बार-बार रिचार्ज करना पड़ रहा है और रिचार्ज के बावजूद बिजली कट रही है. इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं. अब सवाल है कि इस फैसले पर गाजियाबाद की जनता क्या सोचती है, आइए जानते हैं.

गाजियाबाद के महिंद्रा एंक्लेव में रहने वाली ज्योति शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं. उनका कहना है कि यह मीटर सिर्फ नाम के स्मार्ट हैं, लेकिन बिल काफी ज्यादा आ रहा है. कई बार बिल जमा करने के बावजूद बिजली काट दी जाती है और रिचार्ज कराने के बाद भी तुरंत सप्लाई बहाल नहीं होती.

स्मार्ट मीटर को तुरंत हटाया जाए
उन्होंने बताया कि कई बार तीन से चार दिन तक बिजली नहीं आती. पहले जहां उनका बिजली बिल 700 से 800 रुपये के बीच आता था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 3000 रुपये तक पहुंच गया है. सरकार की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने के फैसले का उन्होंने स्वागत किया, लेकिन साथ ही मांग की है कि जो मीटर पहले से लगे हैं, उन्हें भी हटाया जाए.

एक महीने में दो से तीन बार रिचार्ज
आनंद वर्मा ने भी स्मार्ट मीटर को लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने बताया कि पहले अगर बिजली का बिल ज्यादा आता था, तो शिकायत करने का विकल्प होता था, लेकिन अब उपभोक्ताओं को बिल की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती. मीटर में जो राशि दिखाई देती है, वही भरनी पड़ती है, वरना बिजली काट दी जाती है. उनका कहना है कि कई बार महीने में दो से तीन बार रिचार्ज कराना पड़ रहा है. शिकायत करने पर अधिकारियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, बल्कि लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. उन्होंने अधिकारियों पर लापरवाही और रिश्वत लेने तक के आरोप लगाए. उन्होंने भी स्मार्ट मीटर पर रोक के फैसले का समर्थन किया और इसे पूरी तरह हटाने की मांग की.

नौकरीपेशा लोगों के लिए मुश्किल
दिलीप पांडे ने बताया कि स्मार्ट मीटर के कारण घर का बजट बिगड़ गया है. उन्होंने कहा कि एक बार 2500 रुपये का बिल आया, फिर कुछ ही दिनों में बैलेंस माइनस दिखने लगा. इसके बाद बार-बार रिचार्ज करना पड़ रहा है. अब हालत यह है कि हर हफ्ते पैसे डालने पड़ रहे हैं. पहले उनका बिल करीब 1500 रुपये आता था, जो अब बढ़कर 4000 से 5000 रुपये तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि एक नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए हर हफ्ते रिचार्ज कराना मुश्किल है. ऐसे में घर का खर्च, किराया और अन्य जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया है.

रिचार्ज के बाद भी बहाल नहीं होती बिजली
राजकुमार ने भी स्मार्ट मीटर को लेकर गंभीर समस्याएं बताईं. उनका कहना है कि बार-बार रिचार्ज करने के बावजूद बिजली कट जाती है और कई दिनों तक सप्लाई बहाल नहीं होती. कई बार नेटवर्क फेल होने के कारण रिचार्ज भी सफल नहीं हो पाता. शिकायत करने पर अधिकारियों की ओर से फोन नहीं उठाया जाता और न ही समस्या का समाधान किया जाता है.

उन्होंने कहा कि पहले उनका बिजली बिल लगभग 1000 रुपये आता था, जो अब दोगुना हो गया है. इसके बावजूद बिजली की समस्या जस की तस बनी हुई है. उन्होंने कहा कि अगर समय पर पैसे न हों, तो लोगों को अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ता है. आम लोगों की मांग है कि सरकार स्मार्ट मीटर को पूरी तरह हटाकर उन्हें राहत दे.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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