अभी तो गर्मी शुरू हुई है… अगले 40 दिनों को लेकर आई रिपोर्ट सुखा देगी हलक, भारत पर एक और मुसीबत

More Hot Days likely to increase in India: अप्रैल में गर्मी ने कहर बरपाया हुआ है. दिन में आसमान से आग बरसती है तो रात में चिलचिलाती गर्मी हलक सुखा रही है लेकिन अब गर्मी के 40 दिनों को लेकर आई एक रिपोर्ट धड़कन बढ़ा रही है. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट और वॉटर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में आने वाले दो दशकों में गर्म दिन और रातें बढ़ने वाली हैं.

सीईईडब्ल्यू की यह चौंकाने वाली रिपोर्ट बताती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में आने वाले दो दशकों में हर साल 15 से 40 अतिरिक्त असामान्य रूप से गर्म दिन बढ़ सकते हैं. साथ ही कई इलाकों में गर्म रातें भी 20 से 40 दिनों तक बढ़ने की आशंका है. सीईईडब्ल्यू ने यह चौंकाने वाला अनुमान उसी के द्वारा विकसित नए AI-पावर्ड क्लाइमेट प्लेटफॉर्म ‘CRAVIS’ से लगाया है.

सीईईडब्ल्यू के अनुसार क्रेविस प्लेटफॉर्म 40 साल से ज्यादा के भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे और अन्य संस्थानों के डेटा पर आधारित है. यह 2070 तक के मौसम रुझानों का विश्लेषण करता है. प्लेटफॉर्म ने बताया है कि असामान्य गर्म दिन वे दिन हैं जब जिले का औसत तापमान 1981-2010 के आधारभूत स्तर के 90वें प्रतिशत से ऊपर चला जाता है.

क्रेविस ने बताया कि देश के 57 फीसदी से ज्यादा जिले और लगभग 75 फीसदी आबादी पहले ही उच्च से बहुत उच्च गर्मी के जोखिम का सामना कर रही है. अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि दिल्ली में गर्म रातों की संख्या अगले 25 सालों में करीब 180 दिनों से बढ़कर 210 दिनों से ज्यादा हो सकती है, यानी ठंडक की मांग में एक पूरा महीना एक्स्ट्रा बढ़ जाएगा.

डेटा सेंटरों पर मंडराया खतरा
रिपोर्ट कहती है कि डेटा सेंटरों पर भी खतरा बढ़ रहा है. देश के 281 डेटा सेंटर्स में से आधे से ज्यादा पहले ही ऐसे इलाकों में हैं जहां साल में 90 दिनों से अधिक तापमान 35°C से ऊपर रहता है. 2040 तक यह संख्या लगभग 90 फीसदी तक पहुंच सकती है.

बारिश भी बढ़ेगी
हालांकि रिपोर्ट में गर्मी के साथ ही बारिश को लेकर भी चेतावनी दी गई है. जो कहती है कि इस दौरान भारी बारिश की घटनाएं भी बढ़ेंगी. कई जिलों में हर साल 10 से 30 अतिरिक्त भारी बारिश वाले दिन हो सकते हैं. महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे मध्य और दक्षिणी राज्यों में यह बढ़ोतरी सबसे तेज देखी जा सकती है.

कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा
मॉनसून पर भी विरोधाभासी प्रभाव पड़ रहा है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश 2050 तक 6-8% बढ़ सकती है, लेकिन गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत में बारिश में 0.5-1.5 मिलीमीटर प्रति दिन प्रति दशक की कमी आई है. इससे कुछ जगहों पर बाढ़ तो कुछ जगहों पर सूखा बढ़ने की आशंका है.

क्रेविस क्या करता है
प्लेटफॉर्म जिले स्तर पर 279 संकेतकों का विश्लेषण करता है, जिसमें बिजली, कृषि, भूमि उपयोग और स्वास्थ्य क्षेत्र शामिल हैं. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्लेटफॉर्म लॉन्च करते हुए कहा कि अब कॉर्पोरेट बोर्डरूम को फैसले लेते समय जलवायु जोखिम को भी ध्यान में रखना होगा.

कमजोर मॉनसून ऊपर से यह रिपोर्ट
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब भारत कमजोर मॉनसून की तैयारी कर रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी, गर्म रातें और अनियमित बारिश अब भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रही है.

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