अब पानी से जलेगा चूल्हा! एलपीजी-पीएनजी की छुट्टी, दिल्ली के इनोवेटर्स ने बनाया हाइड्रोजन स्टोव

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अब पानी से जलेगा चूल्हा! एलपीजी-पीएनजी की छुट्टी, इसे कहते हैं हाइड्रोजन स्टोव

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Hydrogen Gas Stove: एलपीजी की क्राइसिस के बीच पानी से जलने वाले चूल्हे की खबर लोगों को राहत दे सकती है. दिल्ली में आईआईटी पूर्व छात्रों के स्टार्टअप Green Vize ने पानी से जलने वाला चूल्हा बनाया है. इसे हाइड्रोजन गैस स्टोव कहते हैं जो बिजली और पानी की मदद से चलता है.

दिल्ली. राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और विदेशी गैस पर निर्भरता के बीच एक नई तकनीक सामने आई है, जो भविष्य की रसोई को पूरी तरह बदल सकती है. आईआईटी के पूर्व छात्र प्रशांत सूर्यवंशी, संजीव चौधरी और उनकी टीम ने एक ऐसा हाइड्रोजन गैस स्टोव विकसित किया है, जो पानी से गैस बनाकर खाना पकाने में सक्षम है. यह इनोवेशन न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम माना जा रहा है. इनके स्टार्टअप का नाम Green Vize है.

कैसे काम करता है यह हाइड्रोजन स्टोव?
यह स्टोव इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें पानी (H₂O) को बिजली की मदद से हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) में विभाजित किया जाता है. इन्हीं गैसों को जलाकर खाना पकाया जाता है, जिससे कोई कार्बन नहीं निकलता. 100 एमएल पानी से 4 से 6 घंटे गैस जलती है और एक यूनिट बिजली की खपत होती है. यह फ्लेम आधारित है, इसलिए LPG की तरह ही इस्तेमाल आसान है.

डिस्टिल्ड पानी क्यों जरूरी
इस तकनीक में डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह पूरी तरह शुद्ध होता है और इसमें कोई मिनरल नहीं होता. इससे बिजली का प्रवाह बेहतर होता है, मशीन के मेंब्रेन को नुकसान नहीं पहुंचता. हालांकि, सामान्य पानी या RO पानी का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इससे मशीन की लाइफ कम हो सकती है.

कितना सस्ता है यह विकल्प
घरेलू उपयोग में यह स्टोव लगभग 1 से 1.5 यूनिट बिजली और बहुत कम पानी में काम कर सकता है, जिससे महीने भर में करीब 2.5 लीटर पानी ही पर्याप्त होता है. वहीं कमर्शियल इस्तेमाल में इसका खर्च केवल 20 से 30 रुपये प्रतिदिन तक बताया जा रहा है. हालांकि इसकी शुरुआती कीमत ज्यादा है. सिंगल बर्नर लगभग 1 लाख रुपये, ड्यूल बर्नर 1.5 लाख रुपये और कमर्शियल मॉडल 3.5 लाख रुपये तक का है.

घर की हवा भी होगी साफ
इस स्टोव की खासियत यह है कि इसका बाय-प्रोडक्ट ऑक्सीजन है, जिससे घर की इनडोर एयर क्वालिटी बेहतर होने का दावा किया जा रहा है. यह पूरी तरह स्मोकलेस है और किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं करता.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
हाइड्रोजन गैस के इस्तेमाल के बावजूद इसमें फ्लेम बैक अरेस्टर, लीकेज डिटेक्टर और ऑटोमैटिक शटडाउन जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसमें गैस को स्टोर नहीं किया जाता, बल्कि जरूरत के हिसाब से तुरंत उत्पादन और उपयोग किया जाता है, जिससे हादसे की संभावना कम हो जाती है.

LPG जैसा ही अनुभव
इस स्टोव में फ्लेम होती है, इसलिए किसी भी बर्तन में हर तरह का खाना बनाया जा सकता है. इंडक्शन की तरह अलग बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. आने वाले समय में इसमें IoT तकनीक जोड़कर मोबाइल से कंट्रोल, ऑक्सीजन स्टोरेज और अन्य स्मार्ट फीचर्स भी शामिल करने की तैयारी है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

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