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आईएनए ने फरीदाबाद मॉड्यूल मामले में दाखिल 7,500 पन्नों की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जिसके अनुसार उमर उन नबी के नेतृत्व वाला यह मॉड्यूल दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था. इस मॉड्यूल ने लखनऊ में एक ऑपरेशनल हब तैयार किया था.
7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गयी है.
नई दिल्ली. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (INA) ने फरीदाबाद मॉड्यूल मामले में दाखिल 7,500 पन्नों की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. चार्टशीट के अनुसार उमर उन नबी के नेतृत्व वाला यह मॉड्यूल दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था. एनआईए के अनुसार इस मॉड्यूल ने लखनऊ में एक ऑपरेशनल हब तैयार किया था, जहां विस्फोटक बनाने के लिए रसायनों और अन्य सामान की खरीद की व्यवस्था की गई थी.
जांच में पता चला कि मॉड्यूल में शामिल सदस्यों ने स्थानीय लोगों की मदद से केमिकल और अन्य सामग्री जुटाने की योजना बनाई थी. जांच एजेंसी ने बताया कि इस समूह का मुख्य निशाना भीड़भाड़ वाले इलाके और हिंदू मंदिर थे. इसके अलावा लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधानसभा, सचिवालय और राजभवन जैसे महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी भी की गई थी.
एनआईए के अनुसार शुरुआती धमाके दिल्ली और आसपास के इलाकों में करने की योजना थी. इसके बाद उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हमलों को अंजाम देने की तैयारी थी. जांच में यह भी सामने आया कि मॉड्यूल के कई सदस्य मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े थे. उन्होंने अपने साइंटिफिक नॉलेज का इस्तेमाल कर बम बनाने की तकनीक सीखी. ग्रुप ने यूट्यूब की मदद से खेती में इस्तेमाल होने वाले रसायनों को विस्फोटक सामग्री में बदलने के तरीके सीखे थे. एनआईए के अनुसार उन्होंने करीब 2.5 टन उर्वरक भी जुटा लिया था.
सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि मॉड्यूल ने टीएटीपी (TATP) नामक बेहद खतरनाक विस्फोटक तैयार करने की कोशिश की. इसे ‘मदर ऑफ सैटन’ कहा जाता है. यह विस्फोटक बहुत ज्यादा क्षमता वाला माना जाता है. जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी इसकी विस्फोटक की क्षमता जानते थे, फिर भी इसे सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे थे.
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि मॉड्यूल रॉकेट लॉन्चर, पाइप बम और गैस सिलेंडर बम तैयार करने की योजना पर काम कर रहा था. जांच एजेंसियों का मानना है कि उनकी साजिश दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता था.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें
