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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (Congress Working Committee) की घोषणा कर दी है, इसमें शशि थरूर और सचिन पायलट को भी शामिल किया गया है. इस नई टीम खड़गे से कई संकेत देने की कोशिश है.
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) में फेरबदल की रविवार को घोषणा की गई. ( फोटो- X/PTI)
नई दिल्ली: आगामी राज्य और 2024 के आम चुनावों के लिए कांग्रेस (Congress) भी तैयार है और इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने नई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की घोषणा कर दी है. इसमें कांग्रेस सांसद शशि थरूर और राजस्थान कांग्रेस के नेता सचिन पायलट को शामिल किया गया है. सीडब्लूसी में इन दो नामों को शामिल करके बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है. इसमें सबसे चौंकाने वाला नाम शशि थरूर का रहा, जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में खड़गे को चुनौती दी थी. खड़गे वह चुनाव एकतरफा जीत गए थे, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता शशि थरूर के चुनाव लड़ने और प्रचार-प्रसार के तरीके से नाखुश थे.
दरअसल, उस समय शशि थरूर टीम का हिस्सा रहे कुछ नेताओं ने News18 को बताया था कि उन्हें पीछे हटने को कहा गया था. शशि थरूर के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, यह जानते हुए भी चुनाव लड़ने पर भद्दी टिप्पणियां की गई थीं. वहीं कई बार शशि थरूर की टिप्पणियां भारतीय जनता पार्टी की मदद करती दिखी थीं. शशि थरूर ने कहा था कि पार्टी में उनके आलोचक शिकायत करेंगे कि तीन बार का सांसद ऐसा व्यक्ति है, जिस पर वे भरोसा नहीं कर सकते. जब उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और लोकसभा चुनाव लड़ा तो उन्हें एक बाहरी व्यक्ति के रूप में देखा गया था.
थरूर अपने साथियों का 100% विश्वास अर्जित करने में विफल रहे
तीन बार चुनाव जीतकर सांसद बनने के बाद उनकी राजनीतिक कुशलता स्वीकार की गई थी. हालांकि जब वे अपनी पार्टी के रुख से अलग रहे, तब वे अपने साथियों का 100% विश्वास अर्जित करने में भी विफल रहे हैं. उदाहरण के लिए जब कांग्रेस द्वारा सेनगोल पर सवाल उठाए जाने के बावजूद थरूर ने कहा था, ‘हर किसी को इस प्रतीक को अपनाना चाहिए.” या फिर जब उन्हें पीएम द्वारा स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांड एंबेसडर नामित किया गया था. वास्तव में, थरूर ने यह भी स्वीकार किया था कि पार्टी के चुनाव में ‘समान अवसर नहीं’ थे.
शशि के खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं
लेकिन अब यह सब अतीत की बात लगती है. शशि थरूर को सीडब्ल्यूसी में शामिल किया जाना, यह दर्शाता है कि शीर्ष नेतृत्व को लगता है कि उन्हें उनका हक मिलना चाहिए. इससे यह भी पता चलता है कि जहां तक गांधी परिवार और खड़गे का सवाल है, शशि थरूर के खिलाफ उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं है. कांग्रेस की सबसे शक्तिशाली संस्था सीडब्ल्यूसी के सदस्य के रूप में, केरल में थरूर की स्थिति मजबूत हो जाएगी, जहां उन्हें चौथी बार कड़ी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा.
राजस्थान चुनाव से पहले पायलट की दिशा साफ
सीडब्ल्यूसी में दूसरा महत्वपूर्ण नाम सचिन पायलट का है. यह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके समर्थकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है- कि सचिन पायलट महत्वपूर्ण हैं. राजस्थान चुनावों से पहले यह संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सीएम उम्मीदवार का नाम नहीं बताएगी.
इससे पहले कर्नाटक चुनाव के दौरान सचिन पायलट को स्टार प्रचारक के पद से हटा दिया गया था. इससे ऐसी अटकलें लगने लगी थीं कि वह रेस से बाहर हो गए हैं. लेकिन अब सीडब्ल्यूसी में उनकी एंट्री पर स्थिति साफ हो गई है. हालांकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि सीडब्ल्यूसी सदस्य होने के नाते राजस्थान में उनके लिए पूरी तरह से काम किया जाएगा. लेकिन यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय मामलों और लोकसभा चुनाव से पहले पायलट अहम भूमिका निभाएंगे.
आनंद शर्मा और एके एंटनी जैसे वरिष्ठों को सीडब्ल्यूसी में जगह
हालांकि, CWC में युवाओं को शामिल करने के 50-अंडर-50 के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया है. आनंद शर्मा और एके एंटनी जैसे वरिष्ठों को सीडब्ल्यूसी में जगह दी गई है. नई सीडब्ल्यूसी के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं. एक, यह सुनिश्चित करना कि टीम खड़गे राज्य चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करें और परिणामों को अपने पक्ष में बदल सकें. दूसरा, यह सुनिश्चित करना कि विपक्षी एकता के शोर में कांग्रेस की पहचान न खो जाए, खासकर जब आम आदमी पार्टी (आप) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ अविश्वास और प्रतिस्पर्धा जारी है.
