दिल्ली-गरुग्राम पता है, कहां जा रहा आपके टॉयलेट फ्लश का गंदा पानी? नहीं! तो तस्वीरों में देख लीजिए

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दिल्ली-गरुग्राम पता है, कहां जा रहा आपके टॉयलेट फ्लश का गंदा पानी? जान लो

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आप हम और लाखों लोग रोजाना द‍िल्‍ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद में टॉयलेट फ्लश आउट करते हैं और गंदा पानी तुरंत वहां से बह जाता है, लेक‍िन क्‍या आपको पता है क‍ि यह टॉयलेट फ्लश वॉटर जाता कहां है? आपको जानकर हैरानी होगी क‍ि ये गंदगी कहीं ट्रीट होने नहीं जाती बल्‍क‍ि खुले नालों के द्वारा सीधे यमुना नदी में जाकर ग‍िरती है.

हर सुबह दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद में लाखों लोग टॉयलेट फ्लश करते हैं.वे सोचते हैं कि ये गंदा पानी अब साफ हो जाएगा लेकिन हकीकत कुछ और ही है. यह गंदगी न तो साफ हो रही है और न ही नालों के द्वारा कहीं बाहर जा रही है, आपको जानकर हैरानी होगी कि यह सीधे खुले नालों से यमुना नदी में बह जाती है.

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली रोजाना 992 मिलियन गैलन से ज्यादा सीवेज पैदा करती है लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता सिर्फ 814 MGD की है. ऐसे में पुरानी और टूटी पाइपलाइंस से गंदगी रिसती रहती है. जबकि अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन ही नहीं पहुंची है.इससे टॉयलेट फ्लश का गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है. AI image 

रिपोर्ट बताती है कि जहां सीवर लाइन नहीं है, वहां लोग सेप्टिक टैंकों पर निर्भर हैं. टैंकर वाले इस गंदगी को एफएसटी तक पहुंचाने के बजाय अक्सर नालों में ही डंप कर देते हैं.फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट्स की कमी भी एक बड़ी समस्या है.दिल्ली के कई इलाकों में यह गंदगी यमुना तक का सफर तय करती है.लिहाजा यमुना नदी रोजाना नया जहर पी रही है. AI image 

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गुरुग्राम की बात करें तो यहां रोजाना 433 MLD सीवेज बनता है. लेकिन सिर्फ 388 MLD ही ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच पाता है. 287 MLD से ज्यादा गंदा पानी बिना साफ किए नालों में बह जाता है. द्वारका एक्सप्रेसवे, सोहना रोड और मानेसर जैसे इलाकों में समस्या सबसे ज्यादा है. यह सब आखिरकार नजफगढ़ ड्रेन से यमुना में जाता है. AI image

जानकारी के मुताबिक फरीदाबाद में भी कई ट्रीटमेंट प्लांट ठीक से काम नहीं कर रहे. 45 MLD बादशाहपुर प्लांट सालों तक बंद पड़ा रहा, अब उसे सुधारने की कोशिश चल रही है लेकिन पूरी सीवर लाइन जोड़ने में अभी समय लगेगा. ऐसे में वहां भी गंदा पानी सीधे नालों से यमुना की ओर बह रहा है.भले ही आज ये शहर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सफाई का इंतजाम पीछे छूट गया है.

दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के आंकड़े बताते हैं कि यमुना में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा सामान्य सीमा से 620 गुना ज्यादा हो गई है, ऐसे में नदी में नहाना तो दूर, पानी देखकर ही घिन आती है. दशकों से हजारों करोड़ खर्च हो चुके हैं, फिर भी दी की स्थिति नहीं सुधरी. AI image

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंच रहा है और यमुना नदी गंदे नाले में बदलती जा रही है. यहां नाले के बराबर ही गंदगी बह रही है. ऐसे में नदी की सफाई तभी संभव है जब हर बूंद सीवेज ट्रीटमेंट तक पहुंचे और खुले नाले यमुना नदी में न गिरें.

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