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लता मंगेशकर का वो गाना जो आज दशकों बाद भी बिलकुल नया सा लगता है. इस गाने की धुन हो, लता दी की आवाज या फिर कुछ और… इसका जादू आज भी बिलकुल पहले जैसा ही बरकरार है. अब अगर आपसे कोई कहे कि डायरेक्टर ने पहली बार में इस कालजयी गीत की धुन को रिजेक्ट कर दिया था, तो क्या आप मानेंगे? लेकिन ये बिलकुल सच है.
लता मंगेशकर का ये आइकॉनिक गाना आज भी सुपरहिट है.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं जो सिर्फ गाने नहीं, बल्कि एक एहसास बन जाते हैं. ऐसा ही एक गीत है ‘लग जा गले’, जिसे आज भी सुनते ही लोग उसकी मधुर धुन और भावनाओं में खो जाते हैं. लता मंगेशकर की जादुई आवाज और मदन मोहन के शानदार संगीत से सजा यह गाना दशकों बाद भी उतना ही लोकप्रिय है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब फिल्म के निर्देशक राज खोसला को यह गाना बिल्कुल पसंद नहीं आया था?
31 मई को मशहूर निर्देशक राज खोसला की जयंती के मौके पर उनसे जुड़ा यह दिलचस्प किस्सा एक बार फिर चर्चा में है. 31 मई 1925 को पंजाब में जन्मे राज खोसला हिंदी सिनेमा के उन दिग्गज निर्देशकों में गिने जाते हैं जिन्होंने सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों को एक नई पहचान दी. ‘वो कौन थी’, ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ जैसी फिल्में आज भी क्लासिक मानी जाती हैं.
साल 1964 में रिलीज हुई ‘वो कौन थी’ में साधना और मनोज कुमार मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार मदन मोहन ने तैयार किया था. इसी फिल्म के लिए उन्होंने ‘लग जा गले’ की धुन बनाई थी. हालांकि जब उन्होंने पहली बार यह धुन राज खोसला को सुनाई, तो निर्देशक बिल्कुल प्रभावित नहीं हुए. मदन मोहन के बेटे समीर कोहली ने एक इंटरव्यू में बताया था कि राज खोसला ने धुन सुनने के बाद कहा था कि उन्हें इससे कहीं बेहतर संगीत की उम्मीद थी. उन्हें लगा कि यह धुन फिल्म की स्थिति के हिसाब से प्रभावशाली नहीं है. इतना कहकर वे वहां से चले गए. यह सुनकर मदन मोहन जरूर निराश हुए, लेकिन उन्हें अपनी धुन पर पूरा भरोसा था.
दोबारा सुनते ही धुन के दीवाने हो गए थे डायरेक्टर
कुछ समय बाद एक मीटिंग रखी गई, जिसमें फिल्म से जुड़े लोग और अभिनेता मनोज कुमार भी मौजूद थे. मनोज कुमार ने राज खोसला से रिक्वेस्ट किया कि वे एक बार फिर इस धुन को सुनें. जब मदन मोहन ने दोबारा पूरे भाव के साथ यह धुन गाकर सुनाई, तो माहौल ही बदल गया.कहा जाता है कि इस बार धुन सुनते ही राज खोसला अपनी पहले की राय पर शर्मिंदा हो गए. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा मेरा जूता कहां है. इसपर मनोज कुमार ने पूछा कि क्यों उनका क्या मन कर रहा है? तब उन्होंने बताया कि उनका मन कर रहा है कि अपना जूता उठाकर खुद के सिर पर मार लें, क्योंकि उन्होंने इतनी खूबसूरत धुन को पहली बार में कैसे नकार दिया. यह सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े.
लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से बिखेरा जादू
बाद में यही गीत फिल्म की सबसे बड़ी पहचान बन गया. मनोज कुमार भी अक्सर गर्व से बताते थे कि उन्होंने इस गाने को फिल्म में बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी. समय ने साबित कर दिया कि उनका फैसला बिल्कुल सही था. आज ‘लग जा गले’ सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर है. शायद यही वजह है कि छह दशक बाद भी यह गाना लोगों के दिलों में उसी तरह बसा हुआ है, जैसे पहली बार सुनने पर बसा था.
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From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें
