सरकारी बाबुओं की सैलरी-पेंशन से वसूली… सीएम रेखा गुप्ता का फरमान, अवैध निर्माण पर 2 साल जेल की भी तैयारी

दिल्ली में लगातार हो रहे फायर हादसों, धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के सरेआम उल्लंघन को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सचिवालय में एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग बुलाई जिसमें राजधानी की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई ऐसे बड़े और अभूतपूर्व फैसले लिए गए जो भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों की नींद उड़ाने वाले हैं. सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब दिल्ली में अवैध निर्माण या फायर सेफ्टी के नियमों की अनदेखी पर सिर्फ बिल्डरों पर नहीं बल्कि जिम्मेदार सरकारी अफसरों पर सीधे गाज गिरेगी. मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता की जान-माल की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी.

अफसरों की जेब पर सीधे वार
इस हाई-लेवल मीटिंग का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला भ्रष्ट अधिकारियों की वित्तीय जवाबदेही तय करना रहा. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक के दौरान ‘रेवेन्यू रिकवरी एक्ट, 1890’ (Revenue Recovery Act, 1890) को दिल्ली में पूरी सख्ती और प्रभावी ढंग से लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया. इस कानून के तहत यदि दिल्ली के किसी भी इलाके में अवैध निर्माण या प्रशासनिक लापरवाही पाई जाती है और उसमें किसी सरकारी अधिकारी की मिलीभगत या ढिलाई सामने आती है तो सरकार को होने वाले नुकसान की पाई-पाई उस दोषी अफसर की जेब से वसूली जाएगी. यह वसूली सीधे अधिकारी के मासिक वेतन (सैलरी), रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन या फिर उसकी निजी संपत्ति को कुर्क करके की जा सकेगी. इस कदम से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.

डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत 2 साल की सजा
लापरवाह अफसरों को केवल आर्थिक चोट ही नहीं दी जाएगी बल्कि उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बैठक में ‘डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005’ के कड़े प्रावधानों को भी तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं. सरकार द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस चलेगा, जिसमें उन्हें न्यूनतम दो वर्ष तक की जेल की सजा और भारी-भरकम आर्थिक दंड (जुर्माना) दोनों का सामना करना पड़ेगा. सरकार का मानना है कि जब तक अफसरों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक दिल्ली को अवैध निर्माण के मकड़जाल से मुक्त नहीं कराया जा सकता.

MCD को G+4 बिल्डिंगों पर हथौड़ा चलाने का आदेश
राजधानी को सुरक्षित बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने दिल्ली के सभी जिलाधिकारियों (DM) को अपने-अपने इलाकों में स्पेशल चेकिंग अभियान चलाने के सख्त आदेश दिए हैं. इसके तहत दिल्ली भर के होटलों, गेस्ट हाउसों, बीएंडबी, रेस्टोरेंटों और अन्य सभी कमर्शियल प्रतिष्ठानों की गहन जांच की जाएगी. जो भी संस्थान बिना वैलिड लाइसेंस या फायर एनओसी के चलते पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत सील कर दिया जाएगा.

इसके साथ ही, दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया गया है कि वह ‘जी प्लस फोर’ (G+4) यानी चार मंजिला से ऊंची बनी तमाम अवैध इमारतों को चिन्हित कर तत्काल बुलडोजर एक्शन शुरू करे. सड़कों और गलियों में निकली अवैध बालकनियों, छज्जों और अनधिकृत निर्माणों को भी नोटिस जारी कर ढहाया जाएगा. सबसे खास बात यह है कि MCD को अपनी इस पूरी कार्रवाई की डेली प्रोग्रेस रिपोर्ट (दैनिक रिपोर्ट) सीधे दिल्ली सरकार को सौंपनी होगी, ताकि मॉनिटरिंग में कोई लूपहोल न बचे.

इस हाई-लेवल मीटिंग में दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, बिजली विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें आपसी तालमेल के साथ आने वाले दिनों में दिल्लीव्यापी व्यापक अभियान चलाने का जिम्मा सौंपा गया है.

सवाल-जवाब

अवैध निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या बड़ा फैसला लिया है?

मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया है कि अब अवैध निर्माण और लापरवाही में संलिप्त अधिकारियों के वेतन, पेंशन या संपत्ति से रेवेन्यू रिकवरी एक्ट के तहत सरकारी नुकसान की भरपाई की जाएगी.

दोषी अधिकारियों के खिलाफ किस कानून के तहत जेल की सजा का प्रावधान किया गया है?

डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 के सख्त प्रावधानों के तहत दोषी और लापरवाह अधिकारियों को दो साल तक की जेल और आर्थिक जुर्माने की सजा हो सकती है.

MCD को अवैध निर्माणों के खिलाफ क्या निर्देश दिए गए हैं?

MCD को G+4 (चार मंजिल से ऊपर) के सभी अवैध निर्माणों, अवैध बालकनियों और छज्जों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने और इसकी दैनिक रिपोर्ट दिल्ली सरकार को भेजने का आदेश दिया गया है.

किन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी?

सभी जिलाधिकारियों (DM) के नेतृत्व में होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और बीएंडबी की जांच होगी; बिना वैध लाइसेंस या सुरक्षा मानकों के चलने वाले संस्थानों को सीधे सील किया जाएगा.

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