जल्‍द तैयार होगा 500KM का महा मेट्रो नेटवर्क, बदलेगी दिल्‍ली-NCR की तस्‍वीर, जानें किन इलाकों से गुजरेगी ट्रेन

Delhi Metro Expansion: आज से करीब बीस साल पहले अगर आप दिल्ली की सड़कों पर निकलते, तो आपको हर तरफ भीड़, ट्रैफिक और धुआं ही धुआं दिखता था. बाहरी दिल्ली के इलाकों जैसे नरेला, बवाना या यमुनापार से कनॉट प्लेस आने में लोगों का आधा दिन निकल जाता था. लेकिन आज दिल्ली-एनसीआर की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. कंक्रीट के ऊंचे पिलर्स पर हवा में दौड़ती और जमीन के नीचे सुरंगों से गुजरती दिल्ली मेट्रो ने इन इलाकों का नक्‍शा ही बदल दिया है. आने वाले दिनों में यह नेटकर्व और भी ज्‍यादा मजबूत होने वाला है. फिलहाल दिल्ली मेट्रो करीब 374 किलोमीटर के दायरे में चल रही है. फेज-4 और आने वाले फेज-5ए के नए रूटों के बनने के बाद यह नेटवर्क करीब 500 किलोमीटर के आसपास पहुंच जाएगा.

दिल्ली मेट्रो की इस कामयाबी की इमारत को तीन बड़े चरणों में खड़ा किया गया है. पहले फेज में मेट्रो ने छोटी शुरुआत की और दिल्ली के मेन रोड्स को जोड़ा गया. दूसरे और तीसरे फेज में मेट्रो का असली विस्तार हुआ, जिसने गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे पड़ोसी शहरों को दिल्ली के बेहद करीब ला दिया है. आज की तारीख में केवल दिल्ली मेट्रो के पास 271 स्टेशनों का एक मजबूत नेटवर्क है. अगर हम इसमें ग्रेटर नोएडा की एक्वा लाइन और गुरुग्राम की रैपिड मेट्रो को भी जोड़ लें, तो पूरा नेटवर्क 416 किलोमीटर से ज्यादा लंबा हो जाता है.

दिल्ली मेट्रो का अब तक का सफर
मेट्रो का चरण कुल लंबाई (किलोमीटर में) कुल मेट्रो स्टेशन
पहला चरण 64.751 किमी 59
दूसरा चरण और विस्तार 123.300 किमी 86
तीसरा चरण और विस्तार 162.375 किमी 111
चौथा चरण 24.040 किमी 15
कुल नेटवर्क (सिर्फ DMRC) 374.466 किमी 271
ग्रेटर नोएडा एक्वा लाइन और रैपिड मेट्रो मिलाकर 416.488 किमी 303

फिलहाल कहां-कहां चल रहा है काम?

दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण में लगभग 88.375 किलोमीटर का नया रेल नेटवर्क जमीन पर उतारा जा रहा है, जिसके तहत 69 नए और आधुनिक मेट्रो स्टेशन बनाए जा रहे हैं. इस मेगा एक्‍सपेंशन में छह रूट्स पर दिन-रात काम चल रहा है.

  1. मजलिस पार्क से मौजपुर-बाबरपुर: यह पिंक लाइन का सबसे अहम हिस्सा बनने जा रहा है. यह कॉरिडोर दिल्ली के उत्तर और उत्तर-पूर्वी हिस्सों को एक सीधे लूप में आपस में जोड़ देगा. इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद बाहरी दिल्ली के इलाकों और यमुनापार (पूर्वी दिल्ली) के बीच की दूरी लगभग आधी रह जाएगी और लोगों को राजीव चौक या कश्मीरी गेट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.
  2. कृष्णा पार्क एक्सटेंशन से दीपाली चौक और मजलिस पार्क-रामकृष्ण आश्रम मार्ग: यह करीब 17.528 किलोमीटर लंबा बेहद महत्वपूर्ण रूट है जिसमें कुल 14 नए स्टेशन बनाए जाएंगे. यह मुख्य रूप से मैजेंटा लाइन का अगला विस्तार है, जो पीरागढ़ी, दीपाली चौक और प्रशांत विहार जैसे घने रिहायशी व व्यापारिक इलाकों को सीधे सेंट्रल दिल्ली (रामकृष्ण आश्रम मार्ग) से जोड़ेगा, जिससे रोजाना सफर करने वाले लाखों कामकाजी लोगों को भारी राहत मिलेगी.
  3. दिल्ली एयरोसिटी से तुगलकाबाद: दक्षिण दिल्ली को एयरपोर्ट से जोड़ने वाला यह 23.622 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर फेज-4 का सबसे खास रूट माना जा रहा है, जिसमें 15 स्टेशन होंगे. इसे ‘गोल्डन लाइन’ का नाम दिया गया है. यह लाइन साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर, छतरपुर, अंबेडकर नगर और खानपुर जैसे भारी ट्रैफिक और जाम वाले इलाकों को सीधे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एयरोसिटी से जोड़ देगी, जिससे यात्रियों का अवाजाही में सहूलियत होगी.
  4. इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ: ग्रीन लाइन के इस 12.377 किलोमीटर लंबे नए विस्तार में 10 स्टेशन बनाए जा रहे हैं. अब तक ग्रीन लाइन की ट्रेनें इंद्रलोक या कीर्ति नगर पर ही रुक जाती थीं, लेकिन इस विस्तार के बाद यह लाइन सीधे वॉयलेट लाइन के दिल्ली गेट स्टेशन और ब्लू लाइन के इंद्रप्रस्थ स्टेशन से जुड़ जाएगी. इससे हरियाणा के बहादुरगढ़ और पश्चिमी दिल्ली के लोगों को सीधे मध्य दिल्ली आने का सीधा रास्ता मिल जाएगा.
  5. लाजपत नगर से साकेत जी-ब्लॉक: दक्षिण दिल्ली के दो सबसे बड़े कमर्शियल और रिहायशी हब को आपस में जोड़ने के लिए यह 8.385 किलोमीटर का रूट तैयार किया जा रहा है, जिसमें 8 स्टेशन शामिल होंगे. यह लाइन इस पूरे इलाके के इंटरनल ट्रैफिक और सड़कों पर गाड़ियों के बढ़ते बोझ को बहुत हद तक कम करने का काम करेगी.
  6. रिठाला से कुंडली: रेड लाइन का यह ऐतिहासिक 26.463 किलोमीटर लंबा विस्तार दिल्ली मेट्रो को पहली बार दिल्ली की सीमाओं से बाहर निकालकर हरियाणा के सोनीपत जिले के ‘कुंडली’ बॉर्डर तक ले जाएगा, जिसमें कुल 21 स्टेशन होंगे. यह कॉरिडोर नरेला अनाज मंडी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र और नरेला के विभिन्न सेक्टरों से होकर गुजरेगा, जिससे यहां की पूरी आर्थिक तस्वीर बदलने वाली है.

फेज-5ए और आगे का प्लान और उसके फायदे

दिल्ली-एनसीआर की भविष्य की आबादी और यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डीएमआरसी ने ‘फेज-5ए’ के तहत कुछ बेहद जरूरी लिंक्स को अपने मास्टर प्लान में जगह दी है.

  1. रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ: मध्य दिल्ली के दो सबसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को एक सीधी लाइन में पिरोया जा रहा है. इसकी वजह से यात्रियों को अब अपनी ट्रेनें बार-बार नहीं बदलनी पड़ेंगी, जिससे उनका सफर बिना किसी झंझट के बेहद सीधा, सुगम और समय बचाने वाला साबित होगा.
  2. तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज: यह छोटा सा लिंक ओखला, जामिया मिलिया इस्लामिया और नोएडा जाने वाले मुसाफिरों को सीधे दक्षिण दिल्ली के औद्योगिक और आवासीय इलाकों से जोड़ देगा, जिससे यूपी और दिल्ली के बीच रोज आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोगों का सफर बेहद आसान हो जाएगा.
  3. एयरोसिटी से आईजीआई टर्मिनल-1: एयरोसिटी से आईजीआई एयरपोर्ट टर्मिनल-1 के बीच महज 2.263 किलोमीटर का एक जरूरी रूट बनाया जा रहा है. यह छोटा सा टुकड़ा देश-विदेश से आने वाले हवाई यात्रियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनलों के बीच बिना किसी रुकावट के ट्रांजिट की फैसिलिटी देगा.
  4. सड़कों पर ट्रैफिक और जाम से निजात: इन नए और बड़े रूट्स के पूरी तरह चालू हो जाने से दिल्ली और एनसीआर की जमीनी सड़कों पर गाड़ियों, खासकर निजी कारों और दुपहिया वाहनों का दबाव 30 से 40 फीसदी तक कम होने की उम्मीद है, जिससे लोगों को रोजाना के थकाऊ और लंबे ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए बड़ी राहत मिल जाएगी.
  5. प्रदूषण पर कड़ा प्रहार और पर्यावरण को नया जीवन: जब लाखों लोग निजी वाहनों को छोड़कर मेट्रो की इस वातानुकूलित और तेज रफ्तार सेवा का रुख करेंगे, तो सड़कों पर ईंधन की खपत कम होगी. इससे दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों में होने वाले जानलेवा स्मॉग और वायु प्रदूषण की समस्या पर लगाम लगेगी और राजधानी को साफ हवा मिल सकेगी.

फेज-4 का पूरा काम खत्म होने के बाद दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई और क्षमता कितनी ज्यादा बढ़ जाएगी?
वर्तमान समय में दिल्ली मेट्रो का खुद का ऑपरेशनल नेटवर्क करीब 374 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 271 स्टेशन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. लेकिन जब फेज-4 के तहत निर्माणाधीन 88.375 किलोमीटर लंबे रूट और इसके 69 नए स्टेशन पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएंगे, तब केवल डीएमआरसी का कुल नेटवर्क ही बढ़कर 460 किलोमीटर के पार पहुंच जाएगा. इसके अलावा अगर हम ग्रेटर नोएडा की एक्वा लाइन और गुरुग्राम की रैपिड मेट्रो को भी इसमें जोड़ लें, तो यह पूरा नेटवर्क 500 किलोमीटर के पार पहुंच जाएगा.

क्या दिल्ली मेट्रो इस नए फेज के जरिए दिल्ली की सीमाओं को पार करके हरियाणा के कुछ बिल्कुल नए इलाकों में भी प्रवेश कर रही है?
जी हां, दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आकर्षण रेड लाइन का विस्तार है, जो रिठाला से आगे बढ़कर सीधे हरियाणा के सोनीपत जिले में स्थित कुंडली तक जा रहा है. यह पूरा नया कॉरिडोर लगभग 26.463 किलोमीटर लंबा है जिसमें 21 नए स्टेशन बनाए जा रहे हैं. इस रूट की सबसे खास बात यह है कि यह दिल्ली के सबसे बड़े और पिछड़े माने जाने वाले बवाना औद्योगिक क्षेत्र, नरेला अनाज मंडी और नरेला के तमाम नए सेक्टरों को कवर करेगा. इसके बनने से हरियाणा के कुंडली और सोनीपत बेल्ट के लोग सीधे दिल्ली के दिल से कनेक्ट हो जाएंगे.

दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के निवासियों के लिए सीधे आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचने के लिए कौन सा नया और खास रूट तैयार किया जा रहा है?
दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के लोगों को एयरपोर्ट जाने के लिए अब राजीव चौक, धौला कुआं या मंडी हाउस के लंबे रास्तों से सफर नहीं करना पड़ेगा. फेज-4 के तहत दिल्ली एयरोसिटी से तुगलकाबाद के बीच एक बेहद शानदार और रणनीतिक कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जिसे गोल्डन लाइन या सिल्वर लाइन भी कहा जा रहा है. यह रूट करीब 23.622 किलोमीटर लंबा है और इसमें 15 नए स्टेशन होंगे. यह लाइन महरौली-बदरपुर रोड, छतरपुर, खानपुर और साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर जैसे घनी आबादी और भारी कमर्शियल गतिविधियों वाले इलाकों को सीधे एयरपोर्ट के एयरोसिटी स्टेशन से जोड़ देगी.

यह फेज-5ए (Phase-VA) असल में क्या योजना है और इसे मास्टर प्लान में शामिल करने के पीछे मेट्रो का मुख्य उद्देश्य क्या है?
’फेज-5ए’ दरअसल दिल्ली मेट्रो का एक बहुत ही स्मार्ट, आधुनिक और दूरदर्शी प्लान है, जिसे भविष्य की अचूक कनेक्टिविटी के लिए तैयार किया गया है. इसके तहत लगभग 16.076 किलोमीटर लंबा नेटवर्क और 12 नए स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं. इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा मेट्रो लाइनों के बीच के ‘मिसिंग लिंक्स’ (Missing Links) यानी छूटे हुए रास्तों को आपस में जोड़ना है. उदाहरण के लिए, रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ और तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज जैसे छोटे रूट्स को जोड़कर मेट्रो यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाने के लिए लंबे चक्कर न काटने पड़ें और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी पूरी तरह अभेद्य हो सके.

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