दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में कथित 650 करोड़ रुपये के दवा और मेडिकल उपकरण खरीद घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. रेखा गुप्ता सरकार ने मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए तत्कालीन डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल और बीजेआरएम अस्पताल के पूर्व एचओओ डॉ. विनोद कुमार रंगा को निलंबित कर दिया है. वहीं भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आरोप है कि सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं और उपकरणों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा.
दिल्ली सरकार की सेंट्रल प्रिक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी सामानों की खरीद में कथित 650 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का मामला सामने आया था. इसके बाद उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की गई. सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा दिलाई जाएगी.
ज्यादा रेट पर खरीदी गईं दवाएं
मामले की जड़ सीपीए यानी सेंट्रल प्रिक्योरमेंट एजेंसी में बताई जा रही है. यही एजेंसी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य जरूरी सामग्री की खरीद करती है. जांच में आरोप सामने आए हैं कि कई वस्तुओं की खरीद बाजार भाव से कहीं अधिक कीमतों पर की गई. इनमें दवाओं के अलावा सी-आर्म मशीन, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, एनेस्थीसिया स्टेशन, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चादरें और अन्य मेडिकल उपकरण शामिल हैं.
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जब सतर्कता निदेशालय की टीम ने शकरपुर स्थित सीपीए कार्यालय में छापेमारी की, तब कई महत्वपूर्ण टेंडरों से जुड़ी फाइलें गायब मिलीं. जांच अधिकारियों को संदेह है कि खरीद प्रक्रिया से जुड़े अहम दस्तावेज जानबूझकर हटाए गए हो सकते हैं. छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए गए, लेकिन कई संवेदनशील फाइलों का नहीं मिलना जांच एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल बन गया है.
कई टेंडरों की फाइलें तक हुईं गायब
जिन टेंडरों की फाइलें गायब बताई जा रही हैं, उनमें करोड़ों रुपये की खरीद से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं. एसीबी सूत्रों के मुताबिक इन खरीद प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा उस समय हुआ था जब डॉ. विनोद कुमार रंगा सीपीए में हेड ऑफ ऑफिस (एचओओ) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई को जांच का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
इसी मामले में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सतर्कता शाखा ने तत्कालीन डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल को भी निलंबित कर दिया है. विभागीय आदेश के अनुसार उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है. स्वास्थ्य विभाग में डीजीएचएस का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और विभाग की कई बड़ी खरीद प्रक्रियाएं तथा प्रशासनिक फैसले इसी स्तर पर निगरानी में रहते हैं.
अब तक 40 डॉक्टरों का तबादला
सूत्रों के अनुसार घोटाले की जांच शुरू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल भी किए गए हैं. अब तक करीब 40 डॉक्टरों के तबादले किए जा चुके हैं. माना जा रहा है कि सरकार जांच को प्रभावित करने की किसी भी संभावना को खत्म करना चाहती है.
रेखा गुप्ता सरकार इस पूरे मामले को अपनी भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति की बड़ी परीक्षा के रूप में देख रही है. सरकार का दावा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और चाहे अधिकारी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, अगर उसकी भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई तय है.
फिलहाल एसीबी, सतर्कता निदेशालय और स्वास्थ्य विभाग की टीमें दस्तावेजों की जांच में जुटी हैं. आने वाले दिनों में और अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है. यदि फाइलों के गायब होने, टेंडरों में हेराफेरी और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप साबित होते हैं, तो यह दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के सबसे बड़े खरीद घोटालों में से एक माना जा सकता है.
