क्या है डकवर्थ-लुईस नियम? बेहद आसान शब्दों में समझें इसका पूरा गणित और हार-जीत का समीकरण

नई दिल्ली. क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन जब इस खेल में कुदरत यानी बारिश की एंट्री होती है, तो गणित के समीकरण अच्छे-अच्छे दिग्गजों के दिमाग को घूमा देते हैं. कुछ ऐसा ही नजारा श्रीलंका के दांबुला में देखने को मिला, जहां इंडिया ‘ए’ और अफगानिस्तान ‘ए’ के बीच खेले गए वनडे ट्राई-सीरीज के एक मुकाबले में रनों की बरसात तो हुई, लेकिन जीत का फैसला आसमान से बरसे पानी और डकवर्थ-लुईस नियम के पेचीदा गणित से हुआ. इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बोर्ड पर रनों का पहाड़ खड़ा किया, लेकिन अंत में बाजी अफगानिस्तान के हाथ लगी.

मैच की शुरुआत भारत की मजबूत बल्लेबाजी से हुई. हालांकि, मुकाबले के दौरान ही बारिश ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी थी, जिसके कारण भारतीय पारी में से एक ओवर की कटौती करनी पड़ी. 50 ओवर के इस खेल को भारत के लिए 49 ओवर का कर दिया गया. भारतीय बल्लेबाजों ने इस कटौती का जरा भी दबाव नहीं लिया और अफगानिस्तान के गेंदबाजों पर जमकर प्रहार किए. निर्धारित 49 ओवरों में भारत ‘ए’ ने 9 विकेट खोकर 349 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया.

डकवर्थ-लुईस नियम को यहां आसानी से समझे.

इतने बड़े लक्ष्य को देखकर ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम की जीत लगभग तय है, लेकिन असली ड्रामा तो दूसरी पारी में शुरू होना बाकी था. 350 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान ‘ए’ की शुरुआत शानदार रही. लेकिन मैच में एक बार फिर कुदरत ने दखल दिया. लगातार होती बारिश के कारण खेल को काफी देर तक रोकना पड़ा और मैदान खेलने लायक नहीं रहा. जब खेल दोबारा शुरू करने की स्थिति बनी, तो समय के नुकसान को देखते हुए अफगानिस्तान के सामने ओवरों और रनों की बड़ी कटौती की गई.

अंपायरों ने डकवर्थ-लुईस नियम का सहारा लिया
अफगानिस्तान ‘ए’ को जीत के लिए संशोधित लक्ष्य 38 ओवरों में 294 रनों का मिला. अफगानिस्तान के बल्लेबाजों ने इस संशोधित लक्ष्य को ध्यान में रखकर बेहद आक्रामक और सूझबूझ भरी बल्लेबाजी की. उन्होंने 25.5 ओवरों में महज 2 विकेट खोकर 177 रन बना लिए थे. तभी मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर मैच को रोक दिया. इस बार बारिश इतनी तेज थी कि आगे का खेल होना मुमकिन नहीं था. अंपायरों ने डकवर्थ-लुईस नियम का सहारा लिया और गणना के बाद पाया कि अफगानिस्तान की टीम इस मोड़ पर पार-स्कोर से 4 रन आगे थी. नतीजा यह हुआ कि अफगानिस्तान को ‘डकवर्थ-लुईस नियम’ के तहत 4 रन से विजेता घोषित कर दिया गया.

क्या है डकवर्थ-लुईस नियम और क्यों यह है इतना पेचीदा?
सीमित ओवरों के क्रिकेट (वनडे और टी20) में जब भी बारिश या किसी अन्य प्राकृतिक कारण से खेल बाधित होता है, तो डकवर्थ-लुईस नियम (DLS) लागू किया जाता है. क्रिकेट फैंस के बीच अक्सर इस नियम की आलोचना होती है क्योंकि इसे आसानी से समझ पाना हर किसी के बस की बात नहीं है. इस नियम का मूल सिद्धांत ‘रिसोर्स’ पर आधारित होता है. क्रिकेट में किसी भी टीम के पास रन बनाने के लिए दो मुख्य संसाधन होते हैं. पहला बचे हुए ओवर और दूसरा हाथ में बचे हुए विकेट. डकवर्थ-लुईस नियम के तहत एक खास टेबल तैयार की गई है, जिसमें मैच की अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से दोनों टीमों के पास उपलब्ध ‘रिसोर्स प्रतिशत’ का लेखा-जोखा होता है. यदि मैच के दौरान बाधा आती है, तो टारगेट का पीछा कर रही टीम (टीम 2) को नया लक्ष्य दिया जाता है. अगर मैच में बार-बार बाधा आए, तो जितनी बार खेल रुकेगा, उतनी ही बार यह लक्ष्य बदल सकता है.

कैसे वजूद में आया यह नियम?
इस ऐतिहासिक और क्रांतिकारी गणितीय फॉर्मूले को इंग्लैंड के दो सांख्यिकी विशेषज्ञों फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने तैयार किया था. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार इसका इस्तेमाल साल 1997 में किया गया था. समय के साथ क्रिकेट खेलने के अंदाज में आक्रामकता आई, जिसके बाद इस नियम को और सटीक बनाने की जरूरत महसूस हुई. साल 2015 के वनडे विश्व कप से ठीक पहले, ऑस्ट्रेलियाई अकादमिक स्टीन स्टर्न ने इस फॉर्मूले को आधुनिक क्रिकेट के हिसाब से अपडेट किया. तब से इसे आधिकारिक तौर पर ‘डकवर्थ-लुईस-स्टर्न’ नियम कहा जाता है.

कैसे तय होता है नया टारगेट?
नियम के अनुसार, इस बात का गहन आकलन किया जाता है कि पहली बल्लेबाजी करने वाली टीम ने जितने संसाधनों का उपयोग किया, उसके मुकाबले दूसरी टीम के पास कितने संसाधन बचे हैं. इसका सामान्य फॉर्मूला कुछ इस प्रकार है. टीम 2 का नया लक्ष्‍य = टीम 1 का स्‍कोर x (टीम 2 के रिसोर्स/ टीम 1 के रिसोर्स)

विकेट बचाकर रन गति बनाए रखना भी जरूरी है
सुनने में यह फॉर्मूला भले ही सीधा लगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ‘रिसोर्स वैल्यू’ की सटीक गणना एक बेहद जटिल कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए की जाती है. यही कारण है कि दांबुला वनडे में जब भारत ने 349 रन बनाए, तब भी मजबूत विकेट स्थिति (25.5 ओवर में केवल 2 विकेट खोना) के कारण अफगानिस्तान की टीम डकवर्थ-लुईस के पार-स्कोर से आगे निकल गई और मुकाबला अपने नाम कर लिया. यह मैच इस बात का सटीक उदाहरण है कि मॉडर्न क्रिकेट में सिर्फ रन बनाना ही नहीं, बल्कि विकेट बचाकर रन गति बनाए रखना भी कितना जरूरी है.

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