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Inspiring Story Of Matka Man Algarathnam Natarajan: दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी में जब लोग घर से निकलने में घबराते हैं, तब अलगरथनम नटराजन एक मसीहा बनकर सड़कों पर उतरते हैं. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराकर नया जीवन पाने वाले नटराजन जी ने अपने जीवन का लक्ष्य ही दूसरों की सेवा को बना लिया है. पिछले 8 सालों से वे अपनी पेंशन की राशि से मटकों में ठंडा पानी भरकर मजदूरों और राहगीरों की प्यास बुझा रहे हैं. उनकी यह कहानी साबित करती है कि सेवा करने के लिए केवल जज्बा चाहिए, धन नहीं.
नई दिल्ली: दिल्ली की गर्मी हर साल लोगों की मुश्किलें बढ़ा देती है तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच घर से बाहर निकलना भी आसान नहीं होता. ऐसे मौसम में अगर किसी को रास्ते में ठंडा पानी मिल जाए तो बड़ी राहत महसूस होती है. इसी राहत का काम कर रहे हैं दिल्ली के मटका मैन यानी अलगरथनम नटराजन. लोग इन्हें प्यार से मटका मैन कहते हैं, क्योंकि वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में मिट्टी के मटके रखवाकर लोगों के लिए मुफ्त ठंडे पानी का इंतज़ाम करते हैं. उनका मकसद सिर्फ इतना है कि गर्मी में कोई प्यासा न रहे.
भीषण गर्मी में शुरू किया लोगों की मदद का मिशन
दिल्ली में तापमान बढ़ने के साथ ही सड़क पर काम करने वाले मजदूर, रिक्शा चालक, सिक्योरिटी गार्ड और राह चलते लोग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं. ऐसे में नटराजन शहर के कई हिस्सों में मटके रखवाते हैं, जहां लोग रुककर पानी पी सकते हैं. खास बात यह है कि यह सिर्फ मटके रख देने तक सीमित नहीं है. वह इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि मटकों में रोज साफ और ठंडा पानी भरा जाए. कई जगहों पर लोग खुद भी उनके इस काम में मदद के लिए आगे आने लगे हैं.
बीमारी से लड़ने के बाद बदली जिंदगी
आपको बता दें कि इनकी शुरुआती ज़िंदगी आसान नहीं थी. करीब 34 साल पहले उन्हें कैंसर हो गया था, जिसके बाद ये भारत लौट आए और ठीक होने के बाद उन्होंने समाज सेवा करने का फैसला किया. नटराजन करीब 34 साल तक लंदन में बिजनेस कर रहे थे. जिसके बाद वे भारत लौट आए और यहीं बस गए. हमारे मटका मैन लोगों की प्यास बुझाने के अलावा, लोगों का अंतिम संस्कार और कैंसर से पीड़ित लोगों की भी मदद करते हैं. पानी के साथ-साथ वे कई बार खाना भी बांटते हैं.
8 साल से कर रहे हैं सेवा
नटराजन ने 8 साल पहले इस सेवा की शुरुआत की थी. वे अपनी वैन के साथ सभी मटका स्टैंड पर जाकर उन्हें दिन में दो बार भरते हैं. वैन में करीब 4000 लीटर तक पानी आता है. जिसमें 20 नल और 20 ग्लास रखने के स्टैंड बनाए गए हैं. इतना ही नहीं, नटराजन पूरी तरह अपनी कमाई से यह सेवा चला रहे हैं. वे अपनी पेंशन और बचत से खर्च उठाते हैं.
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