'हमारे भारतीयों को मार रहे हैं वो…' ओमान में 3 नाविकों की मौत से भड़के दिल्ली के ऑटो वाले, बीच सड़क फाड़े डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर! देखें Video

Delhi Viral News: इन दिनों राजधानी की सड़कों पर जो नजारा देखने को मिल रहा है, उसने सबका ध्यान खींच लिया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दिल्ली के ऑटो-रिक्शा चालक अमेरिकी विज्ञापनों को अपने वाहनों से हटाते और उन पर गुस्सा जाहिर करते नजर आ रहे हैं. जो ऑटो-रिक्शा कुछ दिन पहले तक भारत-अमेरिका दोस्ती और अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के विज्ञापनों से सजे हुए थे, आज उन्हीं ऑटो के आसपास विरोध का माहौल दिखाई दे रहा है.

ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीयों की मौत की खबर के बाद कई लोगों में नाराजगी बढ़ी है. इसी नाराजगी की गूंज अब दिल्ली की सड़कों तक पहुंचती दिखाई दे रही है. आखिर वायरल हो रहे इस वीडियो की पूरी कहानी क्या है? ऑटो चालकों का गुस्सा किस बात पर है? और सोशल मीडिया पर इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है? आइए समझते हैं पूरा मामला

क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने ऑटो-रिक्शा चालकों को अपने वाहनों पर अमेरिकी झंडे और डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाले ‘Freedom 250’ पोस्टर लगाने के लिए भुगतान किया था. लेकिन जब ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीयों की मौत की खबर आई तो लोग भड़क गए. कई चालक कथित तौर पर विरोध करने लगे.

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे ऑटो-रिक्शा चालक अपने वाहनों के पीछे लगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टरों और बैनरों को गुस्से में फाड़ते और उखाड़ते हुए नजर आ रहे हैं. एक ऑटो ड्राइवर बेहद भावुक और गुस्से में कहता नजर आ रहा है, ‘वे वहां हमारे निर्दोष भारतीयों को मार रहे हैं और हम यहां उनकी तस्वीरें लगाकर घूमें? कोई भी भाई अपने ऑटो पर अब ये पोस्टर नहीं रखेगा!’ दूसरा ड्राइवर आकर हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगता है.

‘#Freedom250’ अभियान पर फिरा पानी

अमेरिकी दूतावास के एक जनसंपर्क अभियान के बाद से ये पूरा विवाद शुरू हुआ. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मई के महीने में ‘#Freedom250’ नाम से एक अभियान शुरू किया था. इसका मकसद अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के जश्न को प्रमोट करना था. इसके तहत दिल्ली के करीब 100 ऑटो-रिक्शा के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें, अमेरिकी झंडे और ‘हैप्पी बर्थडे अमेरिका!’ जैसे नारों वाले कवर लगाए गए थे. लेकिन अब अमेरिकी सेना की एक क्रूर हरकत ने इस पूरे अभियान को मलबे में तब्दील कर दिया है.

समंदर में क्या हुआ था?

यह गुस्सा यूं ही नहीं भड़का है, इसके पीछे अपनों को खोने का एक गहरा जख्म है. जब 10 जून को ओमान के तट के पास पलाऊ के ध्वज वाले एक कमर्शियल तेल टैंकर ‘एमटी सेटलबेलो’ (MT Settebello) पर अमेरिकी बलों ने हमला कर दिया था. इस जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे. हालांकि अमेरिकी सेना ने 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया, लेकिन इस हमले में 3 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई. इन मृतकों की पहचान पटनाला सुरेश, आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है. जवान बेटों की मौत की खबर जब उनके घरों तक पहुंची, तो परिवारों में कोहराम मच गया.

एक के बाद एक तीन हमले

हैरानी की बात यह है कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी. इससे पहले 8 जून को भी अमेरिकी सेना ने पलाऊ के ही तेल टैंकर ‘मारिवेक्स’ पर हमला कर उसे बेकार कर दिया था, जिस पर 24 भारतीय सेवारत थे (सभी सुरक्षित बचाए गए). वहीं ‘सेटलबेलो’ पर हमले के बाद ओमान के तट पर ही ‘जलवीर’ नाम के एक और जहाज को अमेरिकी नौसेना द्वारा निशाना बनाया गया.

लगातार हुए इन तीन हमलों के बाद भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘सेटलबेलो’, ‘मारिवेक्स’ और ‘जलवीर’ पर हुए ये तीनों हमले अमेरिकी नौसेना की तरफ से हुए थे. नई दिल्ली ने इस गंभीर चूक और भारतीय नागरिकों की मौत को लेकर वाशिंगटन (अमेरिकी सरकार) के सामने बेहद कड़ा और आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है.

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