दुबई से आगे निकल जाएगा गुरुग्राम! ग्लोबल सिटी में बुर्ज खलीफा से भी बड़ी इमारतें बनाने की तैयारी

Gurgaon Global City News: हरियाणा का गुरुग्राम पहले ही भारत के सबसे तेज बढ़ते शहरों में से एक है. हालांकि अब इसकी तैयारी देश नहीं बल्कि विदेशी शहरों को पछाड़ने की है. हरियाणा ही नहीं भारत के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ग्लोबल सिटी में अब कुछ ऐसा बनाने की तैयारी की जा रही है जो सीधे तौर पर दुबई के बुर्ज खलीफा को टक्कर देगा. इस सिटी में देश और दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बनाने की तैयारी की जा रही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक एचएसआईआईडीसी (HSIIDC) ने हरियाणा के ग्लोबल सिटी प्रोजेक्ट में 620 से 700 मीटर ऊंचे प्रस्तावित मिक्स्ड-यूज टावर के निर्माण के लिए 6.7 एकड़ भूमि चिन्हित की है. जहां देश की सबसे ऊंची इमारत बन सकती है. सबसे खास बात है कि जितने एकड़ जमीन तय की गई है, वह दुबई के डाउनटाउन की जगह से काफी ज्यादा है, जहां बुर्ज खलीफा बना हुआ है. ऐसे में संभव है कि यह इमारत भारत की सबसे ऊंची इमारत होने के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी जगह में फैली ऊंची इमारत का भी रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है.

ऐसे में गुरुग्राम में अगर 620 से 700 मीटर ऊंचे एक विशाल मिक्स्ड-यूज टावर के निर्माण की योजना साकार होती है, तो यह न केवल देश की सबसे ऊंची इमारत होगी, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची गगनचुंबी इमारतों में शामिल होकर भारत को वैश्विक पटल पर पहचान दिला सकती है.

सुदीप भट्ट, डायरेक्टर स्ट्रेटजी, व्हाइटलैंड कार्पोरेशन का कहना है कि ग्लोबल सिटी केवल एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि हरियाणा और भारत के भविष्य के शहरी विकास की नई सोच का प्रतीक है. प्रस्तावित टावर का उद्देश्य सिर्फ देश की सबसे ऊंची इमारत का निर्माण करना नहीं, बल्कि गुरुग्राम को ग्लोबल बिजनेस, इनोवेशन और निवेश के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है.

वे आगे कहते हैं, ‘बेहतर कनेक्टिविटी, विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाओं के साथ हम एक ऐसा एकीकृत शहरी इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं, जहां कारोबार, आवास, रोजगार और बेहतर जीवनशैली साथ-साथ आगे बढ़ सकें. हमें विश्वास है कि यह परियोजना गुरुग्राम को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ भारत की आर्थिक प्रगति, निवेश आकर्षण और आधुनिक शहरी विकास के नए मानक स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.’

क्या है ग्लोबल सिटी परियोजना?
बता दें कि ग्लोबल सिटी परियोजना हरियाणा सरकार की प्रमुख शहरी विकास योजनाओं में से एक है, जिसे हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HSIIDC) द्वारा विकसित किया जा रहा है. इसे लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी इसके बेहद खास होने की बात कह चुके हैं. द्वारका एक्सप्रेसवे के पास लगभग 1,000 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना को एक आधुनिक बिजनेस, कमर्शियल, रेजिडेंशियल और संस्थागत हब के रूप में विकसित करने की योजना है. इसका उद्देश्य वैश्विक कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी फर्मों को आकर्षित करना है.

प्रोजेक्ट की जान होगी ये प्रस्तावित टावर
रिपोर्ट के अनुसार, एचएसआईआईडीसी ने ग्लोबल सिटी के भीतर 6.7 एकड़ भूमि को इस विशेष टावर के लिए चिन्हित किया है. इस टावर में व्यावसायिक कार्यालय, होटल, रिटेल स्पेस और आवासीय सुविधाएं शामिल हो सकती हैं. राज्य सरकार परियोजना में निवेश आकर्षित करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए विभिन्न भूमि पार्सलों की नीलामी की भी तैयारी कर रही है. कहा जा रहा है कि यह टॉवर इस पूरे प्रोजेक्ट की जान हो सकती है.

पिछले दो से तीन साल में हरियाणा सरकार ने दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स के साथ कई दौर की चर्चा की है. इन चर्चाओं में बाजार की मांग, वैश्विक मानकों और इस तरह की प्रतिष्ठित इमारत के विकास की संभावनाओं पर विचार किया गया. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहरी क्षेत्र के निर्माण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की जरूरतों का भी आकलन किया गया.
ऐसे में यह नया टॉवर मौजूदा रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा.

फिलहाल ये है भारत की सबसे ऊंची इमारत
अगर यह टावर 620 से 700 मीटर की प्रस्तावित ऊंचाई तक पहुंचता है, तो यह भारत की मौजूदा सबसे ऊंची इमारतों को काफी पीछे छोड़ देगा. वर्तमान में मुंबई की पैलेस रॉयल 320 मीटर की ऊंचाई के साथ देश की सबसे ऊंची इमारत है. वहीं, दिल्ली-एनसीआर की सबसे ऊंची इमारत नोएडा स्थित साइबरथुम टावर-ए है, जिसकी ऊंचाई 213.7 मीटर है. गुरुग्राम की सबसे ऊंची पूर्ण इमारत ट्रंप टावर्स दिल्ली एनसीआर है, जो 201.53 मीटर ऊंची है.

ऐसे में प्रस्तावित ग्लोबल सिटी टावर गुरुग्राम की सबसे ऊंची मौजूदा इमारत से तीन गुना से भी अधिक ऊंचा होगा और भारत की वर्तमान सबसे ऊंची इमारत की ऊंचाई को लगभग दोगुना कर देगा. बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश के साथ यह परियोजना गुरुग्राम को वैश्विक स्तर के व्यापारिक और शहरी केंद्र के रूप में नई पहचान दिला सकती है.

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