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जॉन एड्रिच की हेडिंग्ले में खेली गई वह 310 रनों की नाबाद पारी क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो चुकी है. उनका यह कीर्तिमान न केवल उनकी बेजोड़ बल्लेबाजी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि रिकॉर्ड्स केवल ताकत से नहीं, बल्कि सही टाइमिंग और क्लास से बनते हैं
1965 में जॉन एड्रिच की हेडिंग्ले में खेली थी 310 रनों की नाबाद पारी
नई दिल्ली. 61 साल पहले लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ इंग्लैंड के एक खब्बू बल्लेबाज ने एक ऐसे ऐतिहासिक पारी खेली,जिसने कई सारे स्थापित प्रतिमानों को ध्वस्त कर दिया. आधुनिक युग के टी-20 और वनडे क्रिकेट में चौकों-छक्कों की बरसात देखना आम बात है, लेकिन आज से छह दशक पहले रेड बॉल क्रिकेट में पारंपरिक अंदाज से खेलते हुए मैदान के चारों तरफ बाउंड्रीज का अंबार लगा देना किसी चमत्कार से कम नहीं था. यह रिकॉर्ड सिर्फ रनों का पहाड़ नहीं, बल्कि क्रीज पर बिताए गए अटूट धैर्य, तकनीकी श्रेष्ठता और गजब की मानसिक ताकत का एक जीवंत दस्तावेज है.
जॉन एड्रिच की हेडिंग्ले में खेली गई वह 310 रनों की नाबाद पारी क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो चुकी है. उनका यह कीर्तिमान न केवल उनकी बेजोड़ बल्लेबाजी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि रिकॉर्ड्स केवल ताकत से नहीं, बल्कि सही टाइमिंग और क्लास से बनते हैं. छह दशक बीत जाने के बाद भी यह रिकॉर्ड आज के बल्लेबाजों के लिए एक कसौटी और क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक जादुई कहानी बना हुआ है.
हेडिंग्ले की ऐतिहासिक पारी का ताना-बाना
साल 1965 में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच हेडिंग्ले में खेला जा रहा था. टॉस जीतकर इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. सलामी बल्लेबाज जॉन एड्रिच जब क्रीज पर उतरे, तो उनके इरादे बेहद मजबूत थे. उन्होंने कीवी गेंदबाजों की धारदार गेंदों का सामना बेहद सूझबूझ और आक्रामकता के मिश्रण के साथ किया. एड्रिच ने इस पारी में नाबाद 310 रन बनाए, जो उनके करियर का सर्वोच्च स्कोर भी रहा. इस मैराथन पारी के दौरान उन्होंने मैदान के हर कोने में शॉट खेले. उनकी टाइमिंग इतनी सटीक थी कि गेंद फील्डर्स को छकाती हुई लगातार सीमा रेखा के पार जा रही थी. उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक पारी में कुल 57 बाउंड्री लगाई, जिसमें रिकॉर्ड 52 चौके और 5 गगनचुंबी छक्के शामिल थे.
बाउंड्रीज का महा-रिकॉर्ड: क्यों है यह खास?
क्रिकेट जगत में कई तिहरे शतक लगे हैं, लेकिन एड्रिच की पारी को जो बात सबसे अलग और खास बनाती है, वह है बाउंड्रीज के जरिए बनाए गए रनों का अनुपात. एड्रिच ने अपने 310 रनों में से 238 रन (52×4 = 208 और 5×6 = 30) सिर्फ चौकों और छक्कों की मदद से बनाए उनकी पूरी पारी का लगभग 76.7% स्कोर सिर्फ बाउंड्रीज के जरिए आया.टेस्ट क्रिकेट में लगातार दौड़कर रन बनाना बेहद थकाऊ होता है, लेकिन एड्रिच ने बाउंड्रीज के जरिए अपनी ऊर्जा बचाई और न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह पस्त कर दिया.
आधुनिक क्रिकेट में भी अटूट है यह रिकॉर्ड
क्रिकेट के बदलते स्वरूप, भारी-भरकम बल्ले, छोटी बाउंड्री और पावरप्ले के नियमों के बावजूद आज तक कोई भी बल्लेबाज टेस्ट मैच की एक पारी में एड्रिच की 57 बाउंड्री के आंकड़े को पार नहीं कर सका है. सहवाग, गेल, ब्रायन लारा और बेन स्टोक्स जैसे आक्रामक बल्लेबाजों ने भी टेस्ट में बड़े-बड़े स्कोर बनाए, लेकिन इस विशेष रिकॉर्ड के आसपास भी कोई नहीं पहुंच सका. एड्रिच का यह रिकॉर्ड यह साबित करता है कि क्लासिक और पारंपरिक क्रिकेट खेलकर भी अविश्वसनीय रूप से तेज गति से रन बनाए जा सकते हैं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें
