35 साल के मरीज को रहता था कमर और गर्दन में दर्द, डॉक्टर ने कर दी डबल सर्जरी और फिर…

Last Updated:

गुरुग्राम में स्‍पाइन की समस्‍या से जूझ रहे एक मरीज की डबल सर्जरी की गई है. शैल्बी इंटरनशेनल हॉस्पिटल में 35 वर्षीय मरीज की डॉ. राजेश वर्मा ने दुर्लभ टू लेवल सर्वाइकल और वन लेवल लंबर डिस्क रिप्लेसमेंट किया है. मरीज की हालत स्‍थ‍िर है.

गुरुग्राम में 35 साल के मरीज की दुर्लभ स्‍पाइन सर्जरी की. (सांकेतिक तस्वीर)

एनसीआर के गुरुग्राम से स्पाइन सर्जरी का दुर्लभ मामला सामने आया है. जब 35 साल के एक मरीज की गंभीर स्पाइनल डिजीज के चलते एक साथ डबल सर्जरी कर दी गई. आमतौर पर ऐसा होता नहीं है लेकिन एडवांस स्पाइन एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन के एक प्रयोग ने ऐसे कई मरीजों के लिए इलाज के दरवाजे खोल दिए हैं.

बता दें कि स्पाइन की बीमारी के मामले में लक्ष्य सिर्फ दर्द से राहत देना नहीं, बल्कि मरीज को फिर से गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करना होता है. युवा मरीजों में उनके स्पाइनल मूवमेंट को बनाए रखना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है.

इसी को ध्यान में रखते हुए शैल्बी इंटरनशेनल हॉस्पिटल गुरुग्राम के डॉ. राजेश कुमार वर्मा और उनकी टीम ने एक दुर्लभ स्पाइन सर्जरी को अंजाम दिया है.

दरअसल 35 वर्षीय मरीज को गर्दन और कमर में बहुत ज्यादा दर्द था. उनके लिए चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया था. डॉ. राजेश वर्मा और उनकी टीम ने एक ही बार में टू-लेवल आर्टिफिशियल सर्वाइकल डिस्क रिप्लेसमेंट और वन-लेवल लंबर डिस्क रिप्लेसमेंट सर्जरी को अंजाम दिया.

पारंपरिक तौर पर ऐसे मरीजों में स्पाइनल फ्यूजन किया जाता है. इससे दर्द में राहत तो मिलती है, लेकिन कुछ मूवमेंट सीमित हो जाते हैं. वहीं आर्टिफिशियल डिस्क रिप्लेसमेंट में क्षतिग्रस्त डिस्क् को हटाकर विशेषरूप से डिजाइन आर्टिफिशियल इम्प्लांट किया जाता है. इससे मूवमेंट बनाए रखने में मदद मिलती है. टू लेवल सर्वाइकल डिस्क रिप्लेसमेंट में बहुत विशेषज्ञता की जरूरत होती है. इसी प्रक्रिया के दौरान लंबर डिस्क रिप्लेसमेंट से जटिलता और भी बढ़ जाती है. इसमें सही तरह से प्लानिंग करने और मरीज के चयन की प्रक्रिया अपनाई जाती है.

हालांकि डॉ. राजेश की देखरेख में हुए इलाज के बाद मरीज की हालत एकदम ठीक है और वह अच्छे से रिकवर कर रहा है.

बता दें कि पिछले एक दशक में मोशन-प्रिजर्विंग स्पाइन सर्जरी कुछ चुनिंदा मरीजों के लिए बहुत अहम विकल्प बनकर सामने आई है. इससे उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण दिखी है, जहां पारंपरिक तरीका विफल हो जाता है. स्पाइनल इनस्टेबिलिटी, गंभीर आर्थराइटिस, डिफॉर्मिटी और एडवांस्ड डीजनरेशन के मामले में अभी भी फ्यूजन का सही विकल्प है. हालांकि कुछ चुनिंदा मरीजों में डिस्क आर्थ्रोप्लास्टी से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं. मल्टी-लेवल सर्वाइकल और लंबर डिस्क रिप्लेसमेंट को एक ही सर्जरी में शामिल करना बहुत महत्वपूर्ण है. यह सर्जरी दिखाती है कि कैसे बदलती टेक्नोलॉजी और सर्जिकल विशेषज्ञता से युवा मरीजों के लिए उम्मीद की नई राह खुली है.

About the Author

प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *