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कई लोग बार-बार ऐसे रिश्तों में चले जाते हैं जहां प्यार के साथ तनाव, कंट्रोल और इमोशनल दर्द भी जुड़ा होता है. सवाल यह है कि जब किसी रिश्ते में परेशानी साफ दिख रही हो, फिर भी इंसान उसी तरह के पार्टनर की तरफ क्यों आकर्षित होता है? इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं.
बार-बार टॉक्सिक पार्टनर से अट्रैक्शन.
रिलेशनशिप में किसी से अट्रैक्शन सिर्फ पसंद और केमिस्ट्री से नहीं बनता, बल्कि हमारे पुराने अनुभव, सोचने का तरीका और भावनात्मक जरूरतें भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं. कई बार लोग ऐसे पार्टनर की ओर आकर्षित हो जाते हैं जो शुरुआत में बहुत ज्यादा प्यार, ध्यान और केयर दिखाता है, लेकिन समय के साथ उसका व्यवहार कंट्रोलिंग, नेगेटिव या इमोशनली थका देने वाला लगने लगता है.
साइकोलॉजी के अनुसार, इसके पीछे कुछ खास पैटर्न हैं. आइए जानते हैं…
1. जो जाना-पहचाना लगता है, उसकी तरफ खिंचाव
हमारा दिमाग अक्सर उन चीजों की तरफ आकर्षित होता है जो हमें किसी न किसी रूप में परिचित लगती हैं. अगर किसी व्यक्ति ने बचपन या पुराने रिश्तों में प्यार के साथ तनाव, अनिश्चितता या ज्यादा कोशिश करने वाला अनुभव किया है, तो कई बार वह अनजाने में वैसे ही रिश्तों को नॉर्मल मान सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति के साथ ऐसा होगा, लेकिन पुराने भावनात्मक अनुभव रिश्तों की पसंद को प्रभावित कर सकते हैं.
2. शुरुआत का ज्यादा प्यार और अटेंशन
टॉक्सिक रिश्तों में कई बार शुरुआत बहुत ज्यादा अच्छी लगती है. पार्टनर लगातार मैसेज करना, बहुत तारीफ करना या जरूरत से ज्यादा ध्यान देना शुरू कर सकता है. इस तरह की तेज शुरुआत इंसान को खास महसूस करा सकती है. बाद में जब व्यवहार बदलता है तो व्यक्ति पुराने अच्छे समय को याद करके रिश्ते को बचाने की कोशिश करता रहता है.
3. उम्मीद कि ‘मैं इसे बदल दूंगा/दूंगी’
कई लोग मानते हैं कि उनके प्यार और सपोर्ट से सामने वाला बदल जाएगा. यह सोच उन्हें रिश्ते में लंबे समय तक बनाए रख सकती है. लेकिन किसी भी व्यक्ति का व्यवहार बदलना उसकी खुद की इच्छा और कोशिश पर निर्भर करता है. सिर्फ प्यार से हर समस्या खत्म नहीं होती.
4. लो सेल्फ-वर्थ और खुद को कम आंकना
कुछ मामलों में जिन लोगों का आत्मविश्वास कम होता है, वे ऐसे रिश्तों को भी स्वीकार कर लेते हैं जहां उन्हें बराबरी या सम्मान नहीं मिलता. उन्हें लग सकता है कि शायद उन्हें इससे बेहतर रिश्ता नहीं मिलेगा या यही प्यार का तरीका है. साइकोलॉजी में इसे सेल्फ-वैल्यू और रिलेशनशिप पैटर्न से जोड़कर देखा जाता है.
5. इमोशनल रोलरकोस्टर को प्यार समझ लेना
कई टॉक्सिक रिश्तों में कभी बहुत प्यार मिलता है और कभी दूरी या झगड़ा. यह बदलाव दिमाग को भ्रमित कर सकता है. कभी-कभी इंसान इस उतार-चढ़ाव को ज्यादा जुनून या गहरी केमिस्ट्री समझ लेता है, जबकि असल में यह एक अस्थिर रिलेशनशिप पैटर्न हो सकता है.
कैसे पहचानें कि रिश्ता हेल्दी है या नहीं?
एक हेल्दी रिश्ते में सम्मान, भरोसा, खुलकर बात करने की आजादी और दोनों की भावनाओं की कद्र होती है. अगर किसी रिश्ते में बार-बार डर, तनाव, कंट्रोल या खुद की पहचान खोने जैसा महसूस हो रहा है तो उस पर ध्यान देना जरूरी है.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें
