Last Updated:
लद्दाख घूमने जा रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है. लद्दाख प्रशासन ने पैंगोंग झील और नुब्रा अभयारण्य में ऑफ रोडिंग करने वाले 4 पर्यटकों पर कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. उपराज्यपाल ने सभी पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण की सख्त चेतावनी दी है.
लद्दाख की पैंगोंग झील में ऑफ रोडिंग करने पर 4 पर्यटकों पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
पिछली कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि पहाड़ों या पर्यटक स्थलों पर जाकर अक्सर लोग आपे से बाहर हो जाते हैं. मजे, रील्स और रोमांच के लिए वे नियमों को तोड़ने से भी गुरेज नहीं करते. जहां-तहां कूड़ा फेंकते हैं और घूम-घामकर चले आते हैं लेकिन लद्दाख प्रशासन ने ऐसे पर्यटकों को करारा सबक दिया है और अन्य टूरिस्टों के लिए लकीर भी खींच दी है कि अगर नियम तोड़ा तो आपकी जेब अच्छे से ढीली हो सकती है.
लद्दाख में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने पर यहां आने वाले 4 पर्यटकों पर 2 लाख रुपये का मोटा जुर्माना लगाया गया है. ये सभी पर्यटक पैंगोंग झील में ऑफ-रोडिंग कर रहे थे.
बता दें कि लद्दाख प्रशासन ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पर्यटकों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. पहली बार प्रशासन ने पैंगोंग झील और अन्य संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में अवैध ऑफ-रोडिंग करने वाले पर्यटकों पर भारी जुर्माना लगाया है. प्रशासन ने चार वाहनों पर 50-50 हजार रुपये, यानी कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
यह कार्रवाई पेंगोंग लेक और अन्य संवेदनशील इलाकों में बढ़ रही अवैध ऑफ-रोडिंग की घटनाओं के बाद की गई. प्रशासन के मुताबिक, कुछ पर्यटक रोमांच और स्टंट के नाम पर अपनी गाड़ियां झीलों, नदी-नालों और संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों के भीतर ले जा रहे थे, जिससे नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों को नुकसान पहुंच रहा था.
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की ओर से कहा गया कि लद्दाख देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों का स्वागत करता है, लेकिन सभी को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होना होगा. उन्होंने पर्यटकों और एडवेंचर प्रेमियों से अपील की कि वे संरक्षित क्षेत्रों में वाहन न ले जाएं.
हाल के मामलों में एक यात्री महिंद्रा थार को पैंगोंग झील के पानी में स्टंट करते पाया गया. वहीं एक हुंडई क्रेटा को झील के पास ऑफ-रोडिंग करते पकड़ा गया. इसके अलावा एक अन्य महिंद्रा थार को नुब्रा क्षेत्र के वन्यजीव अभयारण्य में नदी के भीतर चलाते हुए देखा गया. एक और मामले में टोयोटा फॉर्च्यूनर चालक पर तिब्बती गजेल का पीछा करने का आरोप भी लगा.
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि संरक्षित क्षेत्रों में ऑफ-रोड ड्राइविंग वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत दंडनीय अपराध है. भविष्य में ऐसे मामलों में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
About the Author
Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें
