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Ghaziabad News: गाजियाबाद नगर निगम ने विजयनगर के 48 एकड़ शीशम ग्राउंड में प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली बढ़ाने के लिए महा-अभियान शुरू किया है. यहां जापानी मियावाकी तकनीक से 270 प्रजातियों के करीब 7 लाख पौधे रोपे जा रहे हैं. नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह के मुताबिक, दो चरणों में होने वाला यह पौधारोपण एक महीने में पूरा होगा. दो-तीन वर्षों में यह क्षेत्र घने मिनी फॉरेस्ट में बदल जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर हवा की गुणवत्ता सुधरेगी, तापमान घटेगा और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा.
Ghaziabad News: गाजियाबाद में प्रदूषण कम करने और हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू की गई है. विजयनगर स्थित शीशम ग्राउंड, जो लंबे समय से खाली पड़ा था, अब जल्द ही घने मिनी फॉरेस्ट में बदलता नजर आएगा. नगर निगम ने करीब 48 एकड़ में फैली सेना की इस भूमि पर लगभग 7 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है. इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ पौधारोपण करना नहीं बल्कि ऐसा प्राकृतिक जंगल तैयार करना है जो आने वाले वर्षों में शहर की हवा को साफ करने, तापमान कम करने और जैव विविधता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए.
दो चरणों में विकसित होगा 48 एकड़ का हरित क्षेत्र
नगर निगम के उद्यान विभाग के अनुसार, पूरे 48 एकड़ क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है. पहले चरण में 10 एकड़ भूमि पर करीब एक लाख पौधे लगाए जा रहे हैं, जबकि शेष 38 एकड़ क्षेत्र में लगभग छह लाख पौधे रोपे जाएंगे. इस पूरे क्षेत्र को मियावाकी तकनीक से विकसित किया जाएगा, जिसे कम जगह में तेजी से घना जंगल तैयार करने की प्रभावी पद्धति माना जाता है. इस मिनी फॉरेस्ट में करीब 270 प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं.
270 प्रजातियों के पौधे बढ़ाएंगे प्राकृतिक संतुलन
इनमें फलदार, औषधीय और अधिक ऑक्सीजन देने वाले पेड़ शामिल हैं. अलग-अलग प्रजातियों के पौधे एक साथ लगाए जाने से प्राकृतिक संतुलन बनता है, कुछ पौधे मिट्टी को बेहतर बनाते हैं, कुछ छाया देते हैं तो कुछ वातावरण को शुद्ध रखने में मदद करते हैं. यही कारण है कि इस तकनीक से तैयार होने वाला जंगल सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में अधिक तेजी से विकसित होता है.
क्या है जापानी मियावाकी तकनीक और इसके फायदे?
मियावाकी तकनीक की खास बात इसकी घनी पौधारोपण व्यवस्था है. जहां सामान्य तरीके में पौधों के बीच कई मीटर की दूरी रखी जाती है, वहीं इस तकनीक में एक वर्ग मीटर में लगभग तीन पौधे लगाए जाते हैं. पौधों को उनकी ऊंचाई और प्रकृति के अनुसार तीन स्तरों में लगाया जाता है, जिसमें बड़े वृक्ष, मध्यम आकार के पेड़ और झाड़ियां शामिल होती हैं. इससे कुछ ही वर्षों में प्राकृतिक जंगल जैसी संरचना तैयार हो जाती है.
शुरुआती दो वर्षों तक पौधों की नियमित सिंचाई, खरपतवार हटाने और मिट्टी की देखभाल की जाती है, इसके बाद पौधे अपने प्राकृतिक तरीके से बढ़ने लगते हैं और एक-दूसरे का सहारा बनकर तेजी से विकसित होते हैं. यही वजह है कि दो से तीन वर्षों में यह क्षेत्र घने हरित वन का रूप लेने लगता है.
एक महीने में पूरा होगा लक्ष्य: नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि नगर निगम का लक्ष्य एक महीने के भीतर पौधारोपण का कार्य पूरा करना है. उनका कहना है कि करीब दो वर्षों में इन पौधों की ऊंचाई 10 से 12 फीट तक पहुंच सकती है. जब सात लाख पौधे पूरी तरह विकसित होकर पेड़ों का रूप ले लेंगे, तब यह मिनी फॉरेस्ट गाजियाबाद के लिए ऑक्सीजन का बड़ा स्रोत बनेगा और प्रदूषण कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा.
गाजियाबाद में मियावाकी तकनीक कोई नई पहल नहीं है, इससे पहले भी शहर के सात स्थानों पर इसी तकनीक से मिनी फॉरेस्ट तैयार किए जा चुके हैं. वहां अब हरियाली बढ़ने के साथ पक्षियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, साथ ही स्थानीय स्तर पर तापमान में कमी और हवा की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें
