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Noida Latest News: कुछ सपने लेकर लोग घर से निकल नोएडा में रहने आते हैं. मुश्किल से 25 से 30 हजार रुपए की नौकरी मिलती है, तो फिर दूसरी चिंता इतने ही सैलरी में किराया देना और पैसा बचाना होता है. जिस वजह से लोग नोएडा के गांव वाले इलाकों में सस्ती किरायेदारी सस्ती किराएदारी में रहने लगते हैं. लेकिन ममूरा अग्निकांड के बाद सवाल उठ रहे आखिर कौन लेगा इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी?
नोएडा: यूपी में नोएडा के गांवों में सस्ती किरायेदारी की तलाश में रहने वाले हजारों लोगों के सामने अब सुरक्षा का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. सेक्टरों और सोसाइटियों में बढ़ते किराए के बीच कम आय वाले परिवार और नौकरीपेशा लोग गांवों की घनी आबादी में बने बहुमंजिला मकानों और पीजी में रहने को मजबूर हैं. आरोप है कि कई जगह बिना सुरक्षा इंतजाम, बिना फायर एनओसी और तंग गलियों के बीच मकान किराए पर दिए जा रहे हैं. लेकिन इस पूरे अवैध कारोबार पर स्थानीय प्रशासन मौन क्यों है.
कमाई कम किराया उससे ज्यादा
बीते चार-पांच सालों में नोएडा के सेक्टर, सोसाइटियों और गांवों में किराए के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है. 25 से 30 हजार रुपये महीने कमाने वाला व्यक्ति बेहतर सुविधाओं वाले सेक्टर या सोसाइटी में परिवार के साथ आसानी से नहीं रह पाता. गांवों में जहां एक फ्लैट या कमरा 7 से 10 हजार रुपये में मिल जाता है, वहीं सेक्टरों में इसी तरह की सुविधा के लिए 15 से 20 हजार या अच्छे सेक्टर में 30 से 40 हजार रुपये तक किराया देना पड़ता है. यही आर्थिक मजबूरी लोगों को घनी आबादी और कम सुविधाओं वाले इलाकों में रहने के लिए मजबूर करती है. प्राधिकरण और पुलिस की लापरवाही के चलते लोगों को अपनी जान माल का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
50 कमरों वाली बिल्डिंग में फायर सेफ्टी नॉर्म्स तक नहीं
हाल में सेक्टर-66 स्थित मामूरा गांव में एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग ने इस पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. हादसे में दो लोगों की जान चली गई. घटना के बाद सामने आया कि इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल हैं. करीब 50 कमरों वाली इस इमारत में बड़ी संख्या में लोग रह रहे थे. आरोप है कि मकान को अधिक से अधिक कमरे बनाकर किराए और पीजी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन पूरी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी नॉर्म तक नहीं थे. नोएडा के सेक्टर 66 ममूरा अग्निकांड में अधिकारियों के मुताबिक दो लोग ( एक लड़का और एक लड़की) की मौत हो गई और दर्जनों बाइक जलकर खाक हो गई.
मकान मालिक पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों के मुताबिक हादसे के बाद कई सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं. अगर मकान मालिक को सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस दिया गया था तो उसके बाद क्या कार्रवाई हुई? मकान के लीज होल्डर और पीजी संचालक की गिरफ्तारी हुई, लेकिन बिल्डिंग के मालिक की भूमिका क्या है और उसके खिलाफ कार्रवाई कब होगी? ममूरा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पांच मंजिला इमारत किस अनुमति और नियम के तहत व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा रही थी? अगर मकान में दो निकासी रास्ते थे तो भी आग के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो सकी? इन सवालों का जवाब अभी तक जिम्मेदार अधिकारी देने से बच रहे हैं.
क्या कभी सम्बंधित अधिकारी करते है निरीक्षण
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रिहायशी मकानों का इस्तेमाल पीजी और किराए के फ्लैट के तौर पर किया जा रहा है, तो वहां फायर सेफ्टी, आपातकालीन सीढ़ियां और सुरक्षित एग्जिट की व्यवस्था क्यों नहीं है? घनी आबादी में पांच से सात मंजिल तक की इमारतें नियमों के मुताबिक बनी हैं या नहीं, इसकी जांच कौन करता है? स्थानीय पुलिस, नोएडा प्राधिकरण और दमकल विभाग द्वारा ऐसे भवनों का निरीक्षण क्यों नहीं किया जाता?
लाखों किरायेदारों की सुरक्षा पर सवाल
अग्निकांड के चार दिन बाद भी हादसे में नामजद केयरटेकर धर्मेंद्र के फरार होने की बात सामने आ रही है. वहीं, बताया जा रहा है कि भवन का असली मालिक नोएडा के चौड़ा गांव में रहता है और पुलिस अभी तक उस तक कार्रवाई के लिए नहीं पहुंच सकी है. हादसे में जान बचाने वाले पीजी निवासी अब अपने सामान और रहने के ठिकाने को लेकर परेशान हैं. आग के दौरान कई लोग जल्दबाजी में बाहर निकले और उनका सामान अंदर ही छूट गया. बिल्डिंग बंद होने के कारण वे वापस नहीं जा पा रहे हैं. अब सवाल सिर्फ इस एक हादसे का नहीं, बल्कि नोएडा के उन लाखों किरायेदारों की सुरक्षा का है, जो कम किराए के लिए अपनी जिंदगी को जोखिम में डालकर ऐसे मकानों में रहने को मजबूर हैं.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…और पढ़ें
