पिछले कुछ महीनों से पूरे वैश्विक बाजार में काफी उठापटक देखने को मिल रही है. इसका असर रियल एस्टेट पर न हो, ऐसा हो नहीं सकता, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जहां हर तरफ से मंदी, छटनी, घाटे और मारामारी की खबरें आ रही हैं वहीं भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर अलग ही ऊंचाई पर पहुंच रहा है. पिछले एक साल में यहां निवेश का आंकड़ा इतनी तेजी से बढ़ा है, जितना शायद कहीं और न हो. हाल ही में आई भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के ताजा आंकड़े प्रॉपर्टी मार्केट की ऐसी ही तस्वीर पेश कर रहे हैं.
रिपोर्ट बताती है कि भारत के प्रॉपर्टी मार्केट में अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (UHNI) ने वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड निवेश किया है. जो इस क्षेत्र की दीर्घकालिक मजबूती और बेहतर रिटर्न की संभावनाओं को बढ़ रहा है.
SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, वैकल्पिक निवेश फंड (Alternative Investment Funds-AIF) के माध्यम से रियल एस्टेट में निवेश एक वर्ष में करीब 84 प्रतिशत बढ़ गया. वर्ष 2024-25 में जहां इस सेक्टर में कुल निवेश 69,896 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1,28,937 करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी महज एक वर्ष में लगभग 60,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश रियल एस्टेट में आया है. यह अपने आप में रिकॉर्ड है.
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, जहां संपत्ति का वास्तविक मूल्य (Real Asset Value) लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और नियमित आय की संभावना भी बनी रहती है. चूंकि रियल एस्टेट इन दोनों कसौटियों पर खरा उतरता है. यही कारण है कि हाई नेटवर्थ निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में इस सेक्टर की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई है.
शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव बना वजह
दरअसल, वर्ष 2025-26 के दौरान घरेलू शेयर बाजार में अस्थिरता देखने को मिली. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों का असर इक्विटी बाजारों पर पड़ा. ऐसे माहौल में निवेशकों ने अपने निवेश को अधिक स्थिर और लंबे समय वाली संपत्तियों की ओर मोड़ दिया और रियल एस्टेट को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल गया.
सिर्फ घर नहीं, इन चीजों में भी हुआ निवेश
यह निवेश सिर्फ आवासीय परियोजनाओं तक सीमित नहीं है. देश के प्रमुख महानगरों में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का विस्तार, आईटी एवं वित्तीय कंपनियों की नई लीजिंग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर जैसी नई परिसंपत्तियों में भी इन्वेस्टमेंट हुआ है. वहीं प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की मजबूत मांग ने आवासीय बाजार को भी नई गति दी है.
इन शहरों में सबसे तेज मांग
दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों में तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नए एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर और स्मार्ट सिटी परियोजनाएं रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक मूल्य को लगातार मजबूत कर रही हैं. विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र निवेशकों के लिए नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहे हैं.
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि RERA, डिजिटलीकरण, बेहतर नियामकीय व्यवस्था और संगठित डेवलपर्स की बढ़ती हिस्सेदारी ने इस सेक्टर में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को नई ऊंचाई दी है. पहले जहां निवेशकों को परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और पारदर्शिता को लेकर आशंकाएं रहती थीं, वहीं अब नियामकीय सुधारों के कारण निवेश का जोखिम काफी हद तक कम हुआ है. यही वजह है कि घरेलू निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत निवेशकों का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है.
इस बारे में निम्बस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल कहते हैं कि देश के सबसे बड़े निवेशकों का रियल एस्टेट की ओर बढ़ता रुझान इस बात का प्रमाण है कि यह सेक्टर अब केवल पूंजी वृद्धि (Capital Appreciation) ही नहीं, बल्कि नियमित आय और दीर्घकालिक स्थिरता का भी मजबूत माध्यम बन चुका है. लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग की मजबूत मांग, उच्च गुणवत्ता वाले कमर्शियल एसेट्स ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है. विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बाजार आने वाले वर्षों में निवेशकों को बेहतर मूल्य वृद्धि और मजबूत रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं.
वहीं काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी कहते हैं कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार अब परिपक्व निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है. SEBI के आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद हाई नेटवर्थ निवेशकों ने रियल एस्टेट को सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देने वाले विकल्प के रूप में चुना है. भारत में शहरीकरण और कॉर्पोरेट विस्तार की गति को देखते हुए रियल एस्टेट सेक्टर अगले कई वर्षों तक निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता रहेगा.”
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का भी कहना है कि भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब केवल एक पारंपरिक एसेट क्लास नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का सबसे भरोसेमंद माध्यम बन चुका है. अल्ट्रा हाई नेटवर्थ निवेशकों द्वारा एक वर्ष में 84% निवेश वृद्धि यह दर्शाती है कि संस्थागत और बड़े निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है. मजबूत आर्थिक वृद्धि, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, प्रीमियम हाउसिंग की बढ़ती मांग और कमर्शियल रियल एस्टेट के विस्तार ने इस सेक्टर को नई ऊंचाई दी है.
वहीं अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल कहते हैं कि निवेशक अब अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव से हटकर वास्तविक परिसंपत्तियों (Real Assets) में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं. सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश, RERA जैसे नियामकीय सुधार, डिजिटल पारदर्शिता और बढ़ती शहरी आबादी ने इस सेक्टर की बुनियाद को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया है.
ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ते शहरीकरण, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, रोजगार सृजन और आवासीय व वाणिज्यिक संपत्तियों की निरंतर मांग को देखते हुए रियल एस्टेट सेक्टर की विकास यात्रा और मजबूत होने की संभावना है.
