नई दिल्ली. नेहरू विहार के वर्धमान मॉल में हर दिन हजारों छात्र अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने बुनने आते हैं, लेकिन जिस जर्जर इमारत में वे घंटों बैठकर पढ़ाई करते हैं, वह कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. न्यूज 18 की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो वहां का मंजर बेहद डरावना था. MCD ने साल 2023 में ही इस इमारत को डेंजरस घोषित कर खाली करने का नोटिस चिपकाया था लेकिन प्रशासनिक सुस्ती की वजह से यह फाइल तीन साल तक दब कर रह गई. अब जब दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत गिर गई और सात मासूमों की जान चली गई. तब जाकर MCD की नींद टूटी है और नेहरू विहार में बुलडोजर की एंट्री हुई है.
10×10 के कमरों में कैद भविष्य
वर्धमान मॉल के अंदर का माहौल किसी भूलभुलैया जैसा है. यहां 10 फीट चौड़े और 10 फीट लंबे छोटे-छोटे कमरों में गैर-कानूनी तरीके से दर्जनों लाइब्रेरियां चलाई जा रही हैं. गलियां इतनी संकरी हैं कि दो लोग एक साथ ठीक से निकल भी नहीं सकते. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इन लाइब्रेरियों में एंट्री और एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही दरवाजा है. अगर कभी अचानक आग लग जाए या भगदड़ की स्थिति बने तो छात्रों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग नामुमकिन है. इसके बावजूद छात्र हर महीने 2000 तक फीस देकर यहां बैठने को मजबूर हैं.
सत्य निकेतन हादसे के बाद जागा प्रशासन
हाल ही में दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे के बाद नेहरू विहार में रह रहे छात्रों और स्थानीय निवासियों का डर कई गुना बढ़ गया है. यहां की कई लाइब्रेरियों को पहले MCD द्वारा सील भी किया गया था. लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पीछे के रास्तों से या दोबारा ताले तोड़कर इन्हें फिर शुरू कर दिया गया. बाहर से देखने पर पूरी बिल्डिंग टूटी-फूटी और बेहद जर्जर हालत में नजर आती है, लेकिन लाइब्रेरी संचालक छात्रों को यह कहकर गुमराह करते हैं कि इमारत सिर्फ बाहर से पुरानी दिखती है, अंदर से पूरी तरह मजबूत है.”
छात्र का बयान
“हादसे का डर मन में रहता है. परिवार वाले भी कहते हैं कि अच्छी और सुरक्षित जगह पर रहो, लेकिन बाहर से पढ़ने आए हैं. पढ़ाई, रहने और लाइब्रेरी का खर्च पहले ही बहुत है. हर बार ज्यादा पैसे खर्च करके दूसरी जगह जाना हर छात्र के लिए संभव नहीं है.”
पड़ोसी डॉ. आरडी शर्मा का बड़ा आरोप
इलाके के वरिष्ठ निवासी डॉ. आरडी शर्मा ने न्यूज 18 से बातचीत करते हुए शासन और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग लंबे समय से इस डेंजरस बिल्डिंग और इलाके की खस्ताहाल व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं लेकिन उनकी फरियादों को हर बार नजरअंदाज किया गया.
“सरकार अपनी तरफ से काम कर रही है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल उठना जरूरी है. जब 2023 में ही इमारत को लेकर नोटिस लगाया गया था तो उस समय संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? अगर किसी अधिकारी की लापरवाही की वजह से लोगों की जान खतरे में रही, तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.”
जल बोर्ड लीकेज से धंसी सड़क, मकानों में दरारें
नेहरू विहार की यह समस्या सिर्फ एक इमारत तक सीमित नहीं है. डॉ. शर्मा और स्थानीय लोगों का कहना है कि दिल्ली जल बोर्ड की मुख्य पाइपलाइन में लगातार हो रही लीकेज की वजह से यहां की सड़कें बुरी तरह धंस चुकी हैं. बाद में गड्ढों में सिर्फ मलबा डालकर खानापूर्ति कर दी गई, लेकिन पानी का रिसाव जमीन के अंदर लगातार जारी है. इस वजह से आसपास के कई रिहायशी मकानों की नींव कमजोर हो चुकी है और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं.
सवाल-जवाब
सवाल 1: MCD ने नेहरू विहार की इस जर्जर इमारत के खिलाफ कब पहला नोटिस जारी किया था?
जवाब: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने इस खतरनाक और जर्जर इमारत को खाली करने का आधिकारिक नोटिस 18 जुलाई 2023 को ही जारी कर दिया था, लेकिन इस पर वास्तविक डिमोलिशन ड्राइव वर्ष 2026 में जाकर शुरू हुई.
सवाल 2: नेहरू विहार के वर्धमान मॉल में छात्र किस स्थिति में पढ़ाई करने को मजबूर हैं?
जवाब: छात्र 10×10 फीट के बेहद संकरे कमरों में बनी अवैध लाइब्रेरियों में पढ़ाई कर रहे हैं, जहां आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है और हर महीने लगभग ₹2000 तक शुल्क वसूला जा रहा है.
सवाल 3: स्थानीय निवासियों का जल बोर्ड और बुनियादी सुविधाओं को लेकर क्या आरोप है?
जवाब: निवासियों का आरोप है कि जल बोर्ड की पाइपलाइन लीक होने से सड़क धंस गई थी जिसे सिर्फ मलबा डालकर ढक दिया गया. इस रिसाव के कारण आसपास के कई मकानों में दरारें आ चुकी हैं.
सवाल 4: एमसीडी ने इतने सालों बाद अचानक यह डिमोलिशन कार्रवाई क्यों शुरू की?
जवाब: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला अवैध/असुरक्षित इमारत गिरने और 7 लोगों की मौत होने के बाद MCD ने पूरे शहर की जर्जर इमारतों पर कार्रवाई तेज की, जिसके तहत नेहरू विहार में भी बुलडोजर चलाया गया.
