धनतेरस पर 9 कैरेट गोल्ड खरीदने का है प्लान? जानें इसकी शुद्धता, 18-22 कैरेट सोने से अंतर और रीसेल वैल्यू

दिल्ली. सोना खरीदने का मन है, लेकिन बढ़ती कीमतें बजट बिगाड़ रही हैं. ऐसे में 9 कैरेट गोल्ड जूलरी इन दिनों चर्चा में है. अब तक आपने 18 और 22 कैरेट सोने के बारे में सुना होगा, लेकिन 9 कैरेट गोल्ड भी जूलरी मार्केट में अपनी जगह बना रही है. खासकर उन लोगों के बीच इसकी दिलचस्पी बढ़ रही है, जो कम बजट में गोल्ड जूलरी पहनना चाहते हैं. लेकिन सवाल है कि आखिर 9 कैरेट गोल्ड होता क्या है, क्या यह असली सोना है और इसे खरीदना कितना फायदेमंद है.

9 कैरेट गोल्ड में कितना सोना होता है
Gopal Ji Jewellers के विपुल अग्रवाल के मुताबिक, 9 कैरेट गोल्ड में 37.5 फीसदी शुद्ध सोना होता है, जबकि बाकी हिस्से में तांबा, चांदी जैसी दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं. वहीं, 18 कैरेट गोल्ड में 75 फीसदी और 22 कैरेट में करीब 91.6 फीसदी सोना होता है. यानी तीनों की शुद्धता में काफी अंतर है. सोने की बढ़ती कीमतों के बीच 9 कैरेट जूलरी को एक किफायती विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है.

विपुल अग्रवाल बताते हैं कि खासकर लैब ग्रोन डायमंड वाली जूलरी में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे जूलरी की कुल कीमत कम रखने में मदद मिलती है. फिलहाल 9 कैरेट में रिंग और ईयररिंग्स जैसे आइटम बनाए जा रहे हैं.

क्या 9 कैरेट गोल्ड नकली होता है
9 कैरेट गोल्ड को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है कि क्या कम कैरेट होने की वजह से यह नकली सोना है. दरअसल, ऐसा नहीं है. इसमें सोने की मात्रा कम जरूर होती है, लेकिन इसे सिर्फ इसी वजह से नकली नहीं कहा जा सकता. हालांकि, खरीदते समय इसकी शुद्धता और हॉलमार्क की जांच करना जरूरी है.

विपुल के मुताबिक, कम शुद्धता वाला सोना आमतौर पर ज्यादा सख्त हो सकता है. वहीं, 22 कैरेट सोना अपेक्षाकृत नरम होता है, इसलिए कुछ तरह की जूलरी, खासकर चूड़ियों के मामले में मजबूती को ध्यान में रखना जरूरी है.

क्या 9 कैरेट गोल्ड बेचने पर मिलेगा अच्छा पैसा
जूलरी खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत नहीं, बल्कि भविष्य में उसे बेचने पर मिलने वाली रकम भी मायने रखती है. विपुल अग्रवाल का कहना है कि 9 कैरेट गोल्ड की रीसेल वैल्यू उसकी सोने की मात्रा और बाजार के भाव के हिसाब से तय होती है. यानी इसमें 37.5 फीसदी सोने की मात्रा को ध्यान में रखा जाता है. इसका मतलब यह नहीं कि 9 कैरेट जूलरी बेचने पर खरीदारी में खर्च किया गया पूरा पैसा वापस मिल जाएगा. मेकिंग चार्ज, जूलरी की शर्तें, कटौती और खरीदार की पॉलिसी से मिलने वाली रकम प्रभावित हो सकती है.

धनतेरस पर 9 कैरेट गोल्ड खरीद रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
विपुल बताते हैं कि, सोने की जूलरी खरीदते समय हॉलमार्क जरूर देखना चाहिए. साथ ही, जूलरी पर लिखी शुद्धता, बिल और हॉलमार्क से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए. डायमंड खरीदते समय भी उसकी क्वालिटी और सर्टिफिकेशन की जानकारी लेना जरूरी है.

खास बात यह है कि लैब ग्रोन और नेचुरल डायमंड में भी अंतर होता है. इसलिए सिर्फ सर्टिफिकेट देखकर फैसला न करें, बल्कि यह भी समझें कि सर्टिफिकेट किस संस्था ने जारी किया है और उसमें किन बातों की पुष्टि की गई है.

धनतेरस पर अगर आप कम बजट में जूलरी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो 9 कैरेट एक विकल्प हो सकता है. लेकिन खरीदने से पहले उसकी शुद्धता, कीमत, मेकिंग चार्ज और रीसेल की शर्तें समझना न भूलें.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *