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KC Tyagi Resigns: केसी त्यागी ने जेडीयू से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार से अपने रिश्तों और यूपी की राजनीति में अपनी अगली पारी पर खुलकर बात की. उन्होंने जेडीयू में संवाद की कमी और विस्तार की इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए.
केसी त्यागी ने जदयू छोड़ने के कारण बताया.
नई दिल्ली: जनता दल यूनाइटेड के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद केसी त्यागी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद अपना पहला एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है. 23 वर्षों तक जेडीयू के प्रमुख स्तंभ रहे त्यागी ने अपने इस्तीफे के पीछे की कड़वाहट, नीतीश कुमार से अपने रिश्तों और उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अगली पारी को लेकर खुलकर बात की.
नीतीश कुमार ही जेडीयू की आत्मा
केसी त्यागी ने भावुक होते हुए कहा कि मेरा रिश्ता और मतलब सिर्फ नीतीश कुमार से था. नीतीश कुमार जेडीयू की आत्मा हैं. उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले से मुझे और पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता को गहरा दुख और कष्ट हुआ है. उन्होंने साफ किया कि यदि नीतीश कुमार उनके खिलाफ कोई बयान देते तो उन्हें बेहद तकलीफ होती. लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं की आधिकारिक टिप्पणियों की उन्हें कोई परवाह नहीं है.
विस्तार की कमी और संवाद का अभाव
त्यागी ने जेडीयू के सांगठनिक ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से पार्टी में संवाद कम हुआ है. उन्होंने कहा कि 30 अक्टूबर 2003 को नीतीश कुमार, जॉर्ज फर्नांडीज, शरद यादव और दिग्विजय सिंह के साथ मिलकर हमने इस पार्टी का गठन किया था. 23 साल तक मैंने इसके विस्तार में अपनी पूरी भूमिका निभाई. लेकिन अब बिहार के बाहर जेडीयू के विस्तार की संभावना और इच्छाशक्ति कम होती दिख रही है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रियता
6 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके केसी त्यागी अब अपनी पुरानी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि यूपी में बीजेपी, सपा, बसपा और लोकदल की मुख्य राजनीति है. मैंने जेडीयू के सदस्यता अभियान में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि अब मैं अपने साथियों के साथ चर्चा कर आगे का फैसला लूंगा. मेरे साथी मिलकर तय करेंगे कि भविष्य की राह क्या होगी.
बिहार के नए नेतृत्व पर नीतीश की सलाह अनिवार्य
एनडीए गठबंधन का हिस्सा रहते हुए त्यागी ने बिहार के भविष्य पर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि बिहार में नया मुख्यमंत्री या नया नेतृत्व नीतीश कुमार की सलाह के बिना नहीं होना चाहिए. मैं चाहता हूं कि नीतीश कुमार राजनीतिक रूप से और भी सबल दिखें.
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