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मैसूर के पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर लुईस श्रीनिवास ने सिस्टम से बदला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट सहित कई संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी दी. जमीन विवाद में न्याय न मिलने से नाराज NET क्वालिफाइड आरोपी ने डार्क वेब और 50 फर्जी ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया. दिल्ली पुलिस की रिमांड पर मौजूद लुईस ने भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी धमकी भरे मेल भेजे थे.
पुलिस ने आरोपी को अरेस्ट कर लिया है.
देश की सर्वोच्च अदालत से लेकर विभिन्न राज्यों के पुलिस स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ‘डिजिटल टेरर’ लुईस श्रीनिवास के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. लुईस श्रीनिवास सिस्टम से इस कदर नफरत करने लगा था कि उसने डार्क वेब को अपना हथियार बना लिया. दिल्ली पुलिस की 6 दिन की रिमांड पर मौजूद लुईस ने 50 से अधिक फर्जी ईमेल आईडी के जरिए देश की न्याय व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों को हिलाकर रख दिया था. जांच में यह भी सामने आया है कि उसके धमकी भरे ईमेल के तार केवल भारत ही नहीं बल्कि सरहद पार पाकिस्तान से भी जुड़े हुए हैं जिसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है.
न्याय न मिलने की कुंठा ने बनाया साइबर क्रिमिनल
मैसूर के शहरी इलाके में अपनी मां के साथ रहने वाला लुईस श्रीनिवास कभी समाज को दिशा देने वाला शिक्षक था. BA, MA, MBA जैसी डिग्रियां हासिल करने वाला लुईस एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर चुका था. लेकिन मैसूर में जमीन से जुड़े एक विवाद ने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी. लुईस का परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा था जिसमें उसके पिता को उनका हक नहीं मिल पा रहा था. अदालतों की लंबी तारीखों और पुलिस के कथित खराब बर्ताव ने लुईस के भीतर सिस्टम के प्रति गहरी नफरत पैदा कर दी. इसी वजह से उसने कानून (Law) की पढ़ाई करने की भी कोशिश की ताकि खुद न्याय पा सके लेकिन जब वहां भी उसेका भरोसा टूटा तो वह अपराधी बन गया.
डार्क वेब और 50 फेक आईडी का मायाजाल
लुईस श्रीनिवास तकनीक का माहिर खिलाड़ी था. उसने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए 50 से ज्यादा फर्जी ईमेल आईडी बनाईं. वह अपना IP एड्रेस छिपाने के लिए डार्क वेब और उन्नत प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करता था, जिससे उसका सटीक लोकेशन पता लगाना लगभग नामुमकिन था. जांच में पता चला है कि उसने ज्यादातर धमकी भरे ईमेल अपने मोबाइल फोन से ही भेजे थे. वह एक ही दिन में कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा में दर्जनों मेल सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और देश भर के पुलिस विभागों को भेजता था. उसका मकसद केवल डर फैलाना नहीं बल्कि उस सिस्टम को परेशान करना था जिससे उसे नाराजगी थी.
रिमांड पर खुलासे और पाकिस्तान कनेक्शन
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जब लुईस को गिरफ्तार किया तो सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि उसने सिर्फ भारत की अदालतों को ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी धमकी भरे ईमेल भेजे थे. आखिर एक भारतीय नागरिक ने पाकिस्तान में मेल क्यों किए, पुलिस इस इंटरनेशनल एंगल की गंभीरता से जांच कर रही है. फिलहाल, उसका मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस फोरेंसिक जांच (CFSL) के लिए भेजे गए हैं. पुलिस उसे उसके ठिकानों और डिवाइस की बरामदगी के लिए मैसूर भी लेकर गई है.
सिस्टम के लिए बड़ी चेतावनी
लुईस श्रीनिवास का मामला यह दर्शाता है कि कैसे एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति सिस्टम से हताश होकर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल देश की सुरक्षा के खिलाफ कर सकता है. पुलिस के मुताबिक, उसने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जैसी संवेदनशील जगहों को निशाना बनाकर पूरे सुरक्षा तंत्र को चुनौती दी थी. 6 दिन की रिमांड के दौरान पुलिस उससे यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि क्या वह किसी बड़े आतंकी संगठन के संपर्क में था या यह केवल उसके अकेले की ‘लोन वुल्फ’ साजिश थी. आने वाले दिनों में फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कई और बड़े नामों और ईमेल आईडी का खुलासा होने की उम्मीद है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
