नौकरी नहीं मिली, तो छोटे से स्टॉल से शुरू किया ये बिजनेस, आज हर दिन कमा रहे हैं 2,000 रुपये!

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नौकरी नहीं मिली, तो शुरू किया ये बिजनेस, आज हर दिन कमा रहे हैं 2,000 रुपये!

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Business Success Story: शेख हारून और उनके बेटे ने छत्रपति संभाजीनगर में 30 साल से लबडो का बिजनेस शुरू कर लोगों को गन्ने की मिठास से जोड़ा. बता दें कि कैंसर अस्पताल के पास उनके स्टॉल से रोजाना 10 किलो लबडो बिकता है. स्विगी से ऑनलाइन ऑर्डर कर वे 2,000 रुपये तक कमाते हैं.

Small Business Success Story

छत्रपति संभाजीनगर: आपने अपने बचपन में कभी न कभी लबडो खाया होगा. अब आप सोच रहे होंगे कि ये लबडो क्या है? लबडो सूखे गन्ने से बनाई जाने वाली एक मीठी डिश है. छत्रपति संभाजीनगर शहर में एक पिता और बेटे की जोड़ी इस लबडो के बिजनेस से अच्छी कमाई कर रही है. वे पिछले कई सालों से एक छोटे से स्टॉल पर ये काम कर रहे हैं.

30 साल पुराना बिजनेस
छत्रपति संभाजीनगर के शेख हारून और उनके बेटे शेख सुल्तान पिछले 30 साल से लबडो का बिजनेस कर रहे हैं. शेख हारून मूल रूप से संभाजीनगर जिले के फूलंब्री तालुका के रहने वाले हैं. नौकरी की तलाश में वह संभाजीनगर आए. कुछ दिन उन्होंने प्राइवेट कंपनी में काम किया और बाजार में भी नौकरी की, लेकिन उन्हें ये काम पसंद नहीं आया. फिर उन्होंने तय किया कि वे खुद का बिजनेस शुरू करेंगे.

फूड बिजनेस में किया अलग करने का फैसला
शेख हारून ने सोचा कि वे कुछ ऐसा करेंगे जो बाकी लोगों से अलग हो. उन्होंने लबडो का बिजनेस शुरू किया, क्योंकि शहर में कोई और इसे नहीं बेचता था. उन्होंने सोचा कि इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा. इस तरह उन्होंने लबडो बनाकर बेचने का काम शुरू किया.

पिता-बेटे की जोड़ी
बता दें कि शेख हारून का बेटा शेख सुल्तान भी इस काम में उनका साथ देता है. शेख सुल्तान ने 12वीं तक पढ़ाई की है और एक प्राइवेट कंपनी में भी काम किया, लेकिन जब उन्हें मनचाही नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने अपने पिता के साथ बिजनेस करने का फैसला किया. अब ये पिता-बेटे मिलकर लबडो बेचते हैं.

कैंसर अस्पताल के पास लगाते हैं स्टॉल
वे संभाजीनगर के अमखास मैदान के पास कैंसर अस्पताल के सामने अपना छोटा सा स्टॉल लगाते हैं. लबडो घर पर ही तैयार किया जाता है. इसमें उनकी पत्नी, बहू और बेटा भी मदद करते हैं. शेख हारून सालभर के लिए लबडो बनाने के लिए सामग्री (बेर) संभाजीनगर के अलग-अलग इलाकों जैसे गंगापुर, कन्नड़, लसूर और बाहर से भी खरीदकर स्टोर करते हैं.

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हर दिन 10 किलो लबडो बनाना पड़ता है
रोजाना उन्हें 10 किलो से ज्यादा लबडो तैयार करना पड़ता है. शनिवार और रविवार को मांग बढ़ने पर 15 किलो से ज्यादा लबडो तैयार करना पड़ता है. बड़े लोग भी उनके स्टॉल पर लबडो खाने आते हैं.

स्विगी के जरिए बढ़ाया बिजनेस
उन्होंने अपने बिजनेस को स्विगी पर भी लिस्ट किया है. स्विगी के जरिए उन्हें कई ऑर्डर्स मिलते हैं. शेख हारून बताते हैं कि लबडो बेचकर वे रोजाना 2,000 रुपये तक कमा लेते हैं.

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