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मालदा और मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच में एनआईए को साजिश के सबूत मिले हैं. ऐसे में नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी मालदा हिंसा की जगह पर लगे सीसीटीवी कैमरों का फोरेंसिक आडिट कराने जा रही है. यह जांच बिहार और झारखंड तक बढ़ेगी.
पश्चिम बंगाल के मालदा हिंसा मामले में एनआई अब जांच का दायरा बढ़ाने जा रही है.
Malda Violence Case: पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान मालदा हिंसा मामले की जांच कर रही एनआईए तफ्तीश में बड़ा खुलासा हुआ है. एनआईए सूत्रों के मुताबिक अब तक जो सबूत मिले हैं उसमें ये बात सामने आई है कि सुनियोजित साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम दिया गया था. एनआईए को इस हिंसा में रेडिकल एलीमेंट यानी कट्टरपंथी संगठनों का साजिश के तहत शामिल होने का अंदेशा है.
केन्द्रीय जांच एजेंसी सूत्रों के मुताबिक नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी अब अपनी जांच का दायरा और बढ़ाने जा रही है. इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर की दो टीमों का गठन किया गया है. मालदा हिंसा की जगह के सीसीटीवी कैमरों का होगा फोरेंसिक आडिट होने की संभावना भी जताई जा रही है. इस मामले की जांच का नेतृत्व कर रही एनआईए आईजी की निगरानी में अपना काम करेगी.
सूत्रों के मुताबिक मालदा हिंसा में एनआईए के जांच के दायरे को बढ़ाने के पीछे मकसद यही है कि इस तरीके से हुई घटनाओं का आंकलन किया जा सके. मालदा हिंसा के साथ ही मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के पीछे के आरोपियों की भूमिका का भी एक बार फिर से आंकलन किया जा सके. ताकि ये पता चल सके कि कहीं एक ही समूह इस इलाके में हो रही हिंसा के पीछे तो नहीं है.
सूत्रों की मानें तो एनआईए हिंसा की जगह पर पहले से इंस्टाल हुए सारे सीसीटीवी कैमरों का फारेंसिक आडिट होगा क्योंकि कुछ संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी काम नहीं कर रहे थे जिसका जिक्र एनआईए ने कोर्ट में दाखिल की गई अपनी रिपोर्ट में किया है.
जानकारी के मुताबिक मालदा हिंसा के आरोपियों को निर्देश कहां से मिल रहे थे, इसकी जांच के लिए एनआईए अपनी जांच का दायरा पश्चिम बंगाल से बाहर गैर चुनावी राज्य बिहार और झारखंड तक भी बढ़ाएगी.
