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पूर्व आईआरएस अफसर केजरीवाल ने कहा कि वह अपने वर्तमान पेशे से खुश हैं. उनका यह शानदार जवाब सुनकर कोर्ट रूम में मौजूद कई लोग जोर से हंस पड़े. इसी बीच सीनियर वकील संजय हेगड़ ने भी मौके पर एक चुटकी ली. संजय हेगड़े कोर्ट में मनीष सिसोदिया की तरफ से पेश हुए थे. हेगड़े ने केजरीवाल से लीगल प्रोफेशन में कंप्टीशन न बढाने का अनुरोध किया.
करीब साढे चार घंटे चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
नई दिल्ली. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को जब दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष शराब नीति मामले की सुनवाई से उन्हें अलग हो जाने की अपील की, तो न्यायाधीश ने आम आदमी पार्टी के नेता से कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक ने ‘अच्छी दलीलें दीं’ और वह वकील बन सकते हैं. हालांकि, केजरीवाल ने जवाब दिया कि वह अपने वर्तमान पेशे से खुश हैं.
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति मामले में अधीनस्थ अदालत के उस आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर उन्हें (न्यायाधीश को) सुनवाई से हट जाने को लेकर आप प्रमुख की एक घंटे तक चली अपनी दलीलें समाप्त करने के बाद कहा, ‘आपने अच्छी दलीलें दीं. आप वकील बन सकते हैं.’
हालांकि, पूर्व आईआरएस अधिकारी ने जवाब दिया कि वह अपने वर्तमान पेशे से खुश हैं, वहीं आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने उनसे ‘प्रतिस्पर्धा न बढ़ाने’ का अनुरोध किया. सोमवार को सुनवाई दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई और शाम लगभग सात बजे तक चली. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी प्रमुख ने स्वयं अदालती कार्यवाही में जिरह की है.
केजरीवाल ने क्यों कहा, मुझे न्याय नहीं मिलेगा
अरविंद केजरीवाल ने न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से कहा कि आबकारी नीति मामले में उनके (न्यायमूर्ति शर्मा) पिछले फैसलों ने उन्हें (केजरीवाल) ‘लगभग दोषी और भ्रष्ट’ घोषित कर दिया था. केजरीवाल ने आशंका जताई कि अगर न्यायमूर्ति शर्मा आबकारी नीति मामले में उन्हें (पूर्व मुख्यमंत्री को) आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई जारी रखती हैं तो उन्हें न्याय नहीं मिलेगा.
न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई से हटाए जाने के अनुरोध वाली अपनी याचिका पर दलीलें पेश करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सुनवाई से अलग किए जाने संबंधी कानून के तहत सवाल न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा या ईमानदारी का नहीं है, बल्कि वादी के मन में ‘उनके पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने की उचित आशंक’ का है.
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक ने दावा किया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी से जुड़े एक अन्य मामले को छोड़कर, न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष किसी अन्य मामले की सुनवाई इतनी तेज ‘गति’ से नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि इन मामलों की सुनवाई में अदालत द्वारा जांच एजेंसियों के तर्कों का समर्थन करने की एक प्रवृत्ति (रुझान) रही है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
