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DRDO AI Facial Recognition System: बेंगलुरु की डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट लैब फॉर एआई ने एक ऐसा नया फेस पहचान सिस्टम और सेंसर विकसित किया है, जिसे कई डिफेंस एजेंसी अपना चुकी हैं. यहा टोपी, मूंछ या मॉस्क लगाने के बाद भी आतंकियों और अपराधियों की पहचान आसानी से कर लेगा. आइये जानते हैं इसके बारे में.
नई दिल्ली: मुंह छिपा कर या भेष बदलकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों और अपराधियों की अब खैर नहीं. अब वह चाहे मास्क लगा लें या मुंह छिपा लें या फिर वह अपने सिर पर टोपी ही क्यों ना पहन लें… इन सब के बावजूद भी उनकी पहचान हो जाएगी. अब उनका असली चेहरा सामने आ जाएगा. ऐसे अपराधियों और आतंकवादियों की असली पहचान करना आसान हो जाएगा. क्योंकि बेंगलुरु की डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट लैब फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने एक कमाल की तकनीक बना दी है. जिसे सुरक्षा सर्विलांस सिस्टम कहें तो गलत नहीं होगा. फिलहाल देश की कई बड़ी डिफेंस एजेंसी ने इसे अपने यहां इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया है और कुछ और एजेंसी हैं. जो देश की सुरक्षा में काम करती हैं. वह भी इस सिस्टम को अपने यहां लगाने पर मंथन कर रही हैं.
जानें क्यों जरूरी है यह सिस्टम
बेंगलुरु की डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट लैब फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साइंटिस्ट कौशिक ने बताया कि तीन तरह के सुरक्षा प्रोडक्ट इस लैब के जरिए बनाए गए हैं. इसमें सबसे प्रमुख और पहला है पहचान करने वाला सिस्टम, जिसको फेस पहचानने वाला सिस्टम कहें तो गलत नहीं होगा. उन्होंने बताया कि अभी वर्तमान में जितने भी सीसीटीवी कैमरे हमारे देश में लगे हुए हैं. उनकी फुटेज कभी भी साफ नहीं आती है. जिस वजह से अपराधियों और आतंकवादियों को पकड़ने में दिक्कत होती है. इनका मेगापिक्सल 4 या 5 से ज्यादा नहीं होता है. चार या पांच मेगापिक्सल से यह सीसीटीवी कैमरे एक बहुत बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं जिस वजह से सीसीटीवी फुटेज में रिकॉर्डिंग होने के बावजूद सुरक्षा एजेंसी को उस व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो जाता है. यह सिस्टम इस दिक्कत को दूर करेगा.
चेहरा पहचानना हो जाएगा आसान
लैब के साइंटिस्ट कौशिक ने बताया कि उनकी लैब ने जो सिस्टम तैयार किया गया है. इसकी खासियत यह है कि इस डिफेंस सिस्टम को इसलिए ही बनाया गया है. ताकि जो फुटेज या इमेज सीसीटीवी कैमरे में साफ ना हो उस फोटो और इमेज को भी यह सिस्टम पूरी तरह से साफ कर देगा, जिस वजह से सुरक्षा एजेंसी उस व्यक्ति का चेहरा पहचान सकेगी. अगर किसी व्यक्ति ने अपराध के वक्त टोपी पहनी है, चेहरे पर मास्क लगाया है या फिर दाढ़ी लगाई हुई है तो ऐसे में उसका चेहरा जो असली होगा. उसे भी यह सिस्टम दिखा देगा.
कई सुरक्षा एजेंसी इसे अपने यहां लगा चुकी हैं और बाकी अभी इसे लगाने पर विचार कर रही हैं. उन्होंने बताया कि इसे भारत की सुरक्षा एजेंसियों को सौंपने से पहले 15000 लोगों का डेटा लिया गया. उसके बाद 60 मिलियन फोटो ली गई. जो अलग-अलग जगहों से ली गई थी और अलग-अलग दूरी से ली गई थी. इसके बाद गहरी रिसर्च करने के बाद डिफेंस सिस्टम को यह सिस्टम दिया गया है. क्योंकि रिसर्च के बाद रिजल्ट काफी पॉजिटिव आए थे.
ये दो प्रोडक्ट हैं कमाल के
डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट लैब फॉर एआई बेंगलुरु के कौशिक ने बताया कि स्मार्ट सिटी के तहत उनके इस डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा उनकी लैब ने एक सेंसर बनाया है. वह सेंसर ऐसा है कि अगर किसी भी जवान यानी हमारे देश के सोल्जर ने उसे अपने सिर पर लगा लिया और बिना जीपीएस वह एक ऐसी बिल्डिंग या ऐसी जगह पर जा रहा है. जहां पर कोई मैप नहीं है या उसकी कोई पहचान नहीं है तो यह सिस्टम उसके सिर पर लगा होने की वजह से सेंसर के जरिए उसका पूरा मैप तैयार कर लेगा. कहां पर क्या कुछ है यह भी बता देगा. इस सेंसर सिस्टम को भी तैयार करके डिफेंस सिस्टम को दिया जा रहा है. इसके अलावा एक ट्रांसलेटर भी बनाया गया है. जो अलग-अलग भाषाओं में एआई के जरिए काम करेगा. चाहे वहां सिग्नल हो या ना हो. वह अपना काम आसानी से करेगा.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
