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हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित यह नई वेल्डिंग मशीन 16 एम्पियर के सॉकेट में प्लग करते ही चालू हो जाती है. इसमें 3 लीटर का वाटर टैंक दिया गया है, जिसमें पानी भरकर मशीन को चलाया जाता है. यह मशीन पानी को प्रोसेस करके हाइड्रोजन गैस बनाती है, जिसका इस्तेमाल वेल्डिंग और कटिंग के काम में किया जाता है. कंपनी के अनुसार, लगभग 100 मिलीलीटर पानी से यह मशीन करीब 3 घंटे तक काम कर सकती है. यह मशीन पारंपरिक गैस वेल्डिंग मशीनों से काफी अलग है.
नई दिल्ली: औद्योगिक क्षेत्र में एक नई तकनीक सामने आई है, जिसमें हाइड्रोजन आधारित वेल्डिंग और कटिंग मशीन विकसित की गई है. इस मशीन को इनोवेटर संजीव कुमार ने तैयार किया है. उनका दावा है कि यह मशीन कम खर्च में काम करती है और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है. खास बात यह है कि यह मशीन पानी से चलती है और इसके लिए एलपीजी या ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती.
यह मशीन कैसे काम करती है
संजीव कुमार के अनुसार, इस मशीन को चलाना काफी आसान है. इसे किसी भी सामान्य 16 एम्पियर के सॉकेट में प्लग करके शुरू किया जा सकता है. मशीन में 3 लीटर का एक पानी का टैंक दिया गया है, जिसमें पानी भरा जाता है. इसके बाद मशीन उसी पानी से हाइड्रोजन गैस तैयार करती है. इसी हाइड्रोजन गैस की मदद से वेल्डिंग और कटिंग का काम किया जाता है. कंपनी का दावा है कि करीब 100 मिलीलीटर पानी से यह मशीन लगभग 3 घंटे तक चल सकती है.
सामान्य वेल्डिंग मशीन से कैसे अलग है
अभी तक बाजार में जो सामान्य गैस वेल्डिंग मशीनें इस्तेमाल होती हैं, उनमें काम करने के लिए एलपीजी और ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत होती है. इससे न सिर्फ खर्च बढ़ता है, बल्कि बार-बार गैस सिलेंडर भरवाने की झंझट भी रहती है. लेकिन इस नई हाइड्रोजन मशीन में सिलेंडर की जरूरत नहीं होती. इसे सीधे बिजली और पानी की मदद से चलाया जा सकता है. इसी वजह से इसके संचालन खर्च को काफी कम बताया जा रहा है.
ज्वेलरी सेक्टर में उपयोग की संभावना
यह मशीन खास तौर पर ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए काफी उपयोगी मानी जा रही है. संजीव कुमार का कहना है कि जब वेल्डिंग का खर्च कम होगा तो ज्वेलरी बनाने की कुल लागत भी घट जाएगी. इसी कारण कुछ ज्वेलरी दुकानों में इस मशीन का इस्तेमाल शुरू भी हो चुका है.
जीरो कार्बन उत्सर्जन का दावा
इस तकनीक को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि यह जीरो कार्बन उत्सर्जन पर आधारित है. यानी इसके इस्तेमाल से किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता. इसे पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. साथ ही इसमें गैस सिलेंडर स्टोर करने की परेशानी भी खत्म हो जाती है.
कीमत और भविष्य की योजना
इस हाइड्रोजन वेल्डिंग मशीन की कीमत उसकी क्षमता के हिसाब से तय की जाती है. शुरुआती मॉडल की कीमत करीब 1 लाख रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक बताई जा रही है. इसे एक बार का निवेश माना जा रहा है, जिसके बाद बार-बार गैस सिलेंडर भरवाने की जरूरत नहीं पड़ती.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
