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Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह राशि दोषी पाए जाने पर संबंधित मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी. अदालत ने डीजीपी को सभी जिला पुलिस प्रमुखों को सर्कुलर जारी कर अनुपालन कराने का निर्देश दिया है. मामला गाजियाबाद का है. थाना टीला मोड़ के चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह ने 22 फरवरी 2026 को अधिवक्ता चंदर पाल सिंह (जो दिव्यांग हैं) को सुबह 11 बजे जबरन उठा लिया था. उन्हें 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया था. इस केस में अधिवक्ता चंदर पाल सिंह की पत्नी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी.
24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त हो गया है.
प्रयागराज. 24 घंटे से ज्यादा थाने में रखने पर हाईकोर्ट सख्त हो गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट का इससे जुड़ा महत्वपूर्ण आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि 24 घंटे से ज्यादा थाने में रखा तो 25,000 रुपये प्रतिदिन मुआवजा देना होगा. हाईकोर्ट ने कहा विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही में दोषी अधिकारी से मुआवजा राशि वसूली जाएगी. कोर्ट ने कहा कि यह राशि विभागीय कार्यवाही में दोषी पाए जाने पर संबंधित मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के वेतन से काटी जाएगी. कोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी को सभी जिला पुलिस प्रमुखों को सर्कुलर जारी कर अनुपालन कराने का निर्देश दिया है. गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ के चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह ने 22 फरवरी 2026 को अधिवक्ता चंदर पाल सिंह (जो दिव्यांग हैं) को सुबह 11 बजे जबरन उठा लिया. उन्हें 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया था और 50,000 रुपये का बॉन्ड भरने के बावजूद जेल भेज दिया गया.
20 हजार से ज्यादा नहीं ले सकते बॉन्ड
इस केस में अधिवक्ता चंदर पाल सिंह की पत्नी जो स्वयं भी दिव्यांग हैं, ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की. इसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप पर 25 फरवरी 2026 को उन्हें रिहा किया गया. याचिका पर अधिवक्ता जितेंद्र राणा और राजर्षि गुप्ता ने बहस की. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किए और कहा कि निवारक हिरासत में केवल 20,000 रुपये तक का व्यक्तिगत बॉन्ड (बिना जमानतदार) लिया जाए. अधिक राशि के लिए मजिस्ट्रेट को लिखित कारण देना होगा.
छह सप्ताह में देना होगा 3 दिन का 75 हजार
उसी दिन रिहाई बॉन्ड भरते ही व्यक्ति को तत्काल रिहा किया जाएगा. 24 घंटे से अधिक हिरासत पर 25,000 रुपये प्रतिदिन मुआवजा देय होगा, जो दोषी अधिकारी के वेतन से वसूला जाएगा. लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक विभागीय कार्यवाही अनिवार्य होगी. कोर्ट ने याची चंदर पाल सिंह को 75,000 (तीन दिन × ₹25,000) मुआवजा देने का आदेश दिया, जो छह सप्ताह में राज्य सरकार द्वारा अदा किया जाएगा. बाद में यह राशि एसीपी शालीमार गार्डन और एसएचओ थाना टीला मोड़ से विभागीय जांच के बाद वसूली जाएगी. कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद को 14 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है और कहा कि पालन नहीं किया तो हाजिर होना होगा.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
