दिल्लीवालों के फेफड़ों पर जहरीली गैस का हमला! 2022 के बाद सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंचा CO2 का लेवल

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दिल्लीवालों के फेफड़ों पर जहरीली गैस का हमला! 2022 के बाद CO2 का लेवल खतरनाक

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दिल्ली में जनवरी से मई तक कार्बन मोनोऑक्साइड स्तर शुरुआती पांच महीनों में खतरनाक स्‍तर तक रहा है. आंकड़ों के अनुसार 2022 के बाद CO2 का लेवल यहां तक पहुंचा है. थिंक टैंक और शोध एवं सलाहकार संस्था ‘एन्वायरोकैटलिस्ट्स’ ने आकड़े जारी किए गए हैं.

कार्बन मोनोऑक्साइड (co2) की औसत मात्रा 1.89 मिलीग्राम प्रति घन मीटर रही, जो सेहत के लिए नुकसानदेह है.

नयी दिल्ली.इस साल जनवरी से लेकर मई तक यानी साल के शुरुआती पांच महीनों में दिल्‍लीवालों के फेफड़ों पर जहरीली गैस का हमला हुआ है. 2022 के बाद CO2 का लेवल सबसे खतरनाक स्‍तर पर पहुंच गया है. इस तरह दिल्‍ली वालों के लिए पिछले पांच महीने खतरनाक रहे हैं. ये आंकड़े थिंक टैंक और शोध एवं सलाहकार संस्था ‘एन्वायरोकैटलिस्ट्स’ द्वारा जारी किए गए हैं.

आंकड़ों के मुताबिक इस साल एक जनवरी से 31 मई तक कार्बन मोनोऑक्साइड (co2) की औसत मात्रा 1.89 मिलीग्राम प्रति घन मीटर रही, जो 2022 के बाद इस अवधि का सबसे अधिक स्तर है. 2022 में यह 1.90 मिलीग्राम प्रति घन मीटर थी.

पिछले कुछ साल के आंकड़े

अगर बात दूसरे साल के आंकड़ों की हो तो 2020 में 1.48 मिलीग्राम प्रति घन मीटर, 2021 में 1.89 मिलीग्राम प्रति घन मीटर, 2023 में 1.72 मिलीग्राम प्रति घन मीटर, 2024 में 1.64 मिलीग्राम प्रति घन मीटर और 2025 में 1.66 मिलीग्राम प्रति घन मीटर रहा है.

क्‍या है CO2 का मानक

भारतीय मानकों के अनुसार कार्बन मोनोऑक्साइड की अधिकतम सुरक्षित सीमा चार मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर (8 घंटे का औसत) है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार यह सीमा चार मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर (24 घंटे का औसत) है.

स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ सकता है असर

कार्बन मोनोऑक्साइड एक विषैली, रंगहीन और गंधहीन गैस होती है, जो हीमोग्लोबिन से जुड़कर रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर देती है. इसके कारण दिल और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति घट सकती है, जिससे सिरदर्द, चक्कर और थकान हो सकती है. लंबे समय तक या ज्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड के संपर्क में रहने से सीने में दर्द, दिल की धड़कन बढ़ने-कम होने और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है.

वाहनों की संख्‍या अधिक भी कारण

‘एन्वायरोकैटलिस्ट्स’ के संस्थापक और मुख्य विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा कि वाहनों की अधिक संख्या और उनसे होने वाले स्थानीय उत्सर्जन तथा अन्य पदार्थों के दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि बढ़ते स्तर यह दिखाते हैं कि शहर में दहन गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिन्हें खासकर निजी वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कम करना जरूरी है, और इसके बजाय स्वच्छ इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की ओर बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि शहर अधिक पैदल चलने योग्य, रहने योग्य और कम भीड़भाड़ वाला बनेगा.

About the Author

Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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