SBI PO परीक्षा में सफलता के लिए आखिरी 30 दिन में रिवीजन, क्वांट, रीजनिंग, इंग्लिश, करंट अफेयर्स पर फोकस, रोज 8 घंटे करें पढ़ाई

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सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले लाखों युवाओं की पहली पसंद भारतीय स्टेट बैंक की प्रोबेशनरी ऑफिसर (SBI PO) परीक्षा मानी जाती है. हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही उम्मीदवारों को मिल पाती है ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि तैयारी की शुरुआत कैसे करें, किन विषयों पर ज्यादा ध्यान दें और अंतिम दिनों में क्या रणनीति अपनाई जाए.

गाजियाबादः सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले लाखों युवाओं की पहली पसंद भारतीय स्टेट बैंक की प्रोबेशनरी ऑफिसर (SBI PO) परीक्षा मानी जाती है. हर साल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही उम्मीदवारों को मिल पाती है ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि तैयारी की शुरुआत कैसे करें, किन विषयों पर ज्यादा ध्यान दें और अंतिम दिनों में क्या रणनीति अपनाई जाए.

आखिरी के 30 दिन की जाने रणनीति

अजीत नागर ने बताया कि परीक्षा से पहले के आखिरी 30 दिन किसी भी अभ्यर्थी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान नई चीजें पढ़ने के बजाय उन विषयों को रिवीजन  करना चाहिए जो परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं उन्होंने कहा कि क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड में प्रतिशत, लाभ-हानि, साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज, डेटा इंटरप्रिटेशन (DI) और टाइम एंड वर्क जैसे अध्यायों पर विशेष ध्यान देना चाहिए इन टॉपिक्स से हर वर्ष अच्छे स्तर के प्रश्न पूछे जाते हैं और इनकी मजबूत तैयारी बेहतर स्कोर दिलाने में मदद करती है.

रीजनिंग सेक्शन को लेकर उन्होंने बताया कि सीटिंग अरेंजमेंट, पजल और इनइक्वालिटी जैसे विषयों की नियमित प्रैक्टिस बेहद जरूरी है वहीं अंग्रेजी विषय में रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन पर पकड़ मजबूत करनी चाहिए इसके अलावा रोजाना अखबार पढ़ने और शब्दावली बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए, जिससे अंग्रेजी सेक्शन में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके.

करेंट अफेयर्स पर करें फोकस

करेंट अफेयर्स को लेकर उन्होंने कहा कि कई छात्र परीक्षा के बिल्कुल नजदीक आने पर इसे पढ़ना शुरू करते हैं जो एक बड़ी गलती है. अभ्यर्थियों को प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट करंट अफेयर्स के लिए निकालना चाहिए बैंकिंग, अर्थव्यवस्था, सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़े अपडेट नियमित रूप से पढ़ने चाहिए. मॉक टेस्ट सफलता की कुंजी हैं कई छात्र पर्याप्त तैयारी करने के बावजूद मॉक टेस्ट नहीं देते, जिससे उनकी वास्तविक परीक्षा में समय प्रबंधन और प्रश्न चयन की क्षमता कमजोर रह जाती है. रोजाना एक मॉक टेस्ट देने के साथ उसका विश्लेषण करना भी उतना ही जरूरी है केवल टेस्ट देना काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि गलती कहां हुई और उसे कैसे सुधारा जाए.

औसतन 8 घंटे की करें पढ़ाई

अजीत नागर ने बताया कि अभ्यर्थियों को रोजाना लगभग आठ घंटे पढ़ाई करनी चाहिए इसमें कन्टेन्ट और  रीजनिंग को दो-दो घंटे, अंग्रेजी को एक घंटा, करंट अफेयर्स को 45 मिनट तथा शेष समय मॉक टेस्ट और उसके विश्लेषण के लिए देना चाहिए. उन्होंने कहा कि कम अंक आने पर निराश होने के बजाय एक्यूरेसी पर ध्यान देना चाहिए जब सटीकता बढ़ेगी तो स्पीड अपने आप बेहतर हो जाएगी.

कोचिंग को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण सलाह दी उनका कहना है कि छात्र एक ही कोर्स और एक ही कोचिंग पर भरोसा करें. बार-बार रणनीति बदलना और अलग-अलग स्रोतों से पढ़ाई करना भ्रम पैदा करता है. सोशल मीडिया और अनावश्यक सलाहों से दूरी बनाकर नियमित अभ्यास, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ तैयारी करने वाले अभ्यर्थी निश्चित रूप से सफलता के करीब पहुंच सकते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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