Ghaziabad News : क्या हीट पीरियड से बढ़ रहा कुत्तों का आंतक? गाजियाबाद के अस्पतालों में आई डॉग बाइट की बाढ़

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Dog Bites Reasons : यूपी के गाजियाबाद में कुत्तों के काटने की घटनाएं खतरनाक तेजी से बढ़ती जा रही हैं. सरकारी अस्पतालों में रोजाना 300 से ज्यादा डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं. सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों को लेकर है. लोकल 18 से गाजियाबाद के पशु चिकित्सक डॉ. विजय पाठक बताते हैं कि बच्चे इन खतरों को ठीक से समझ नहीं पाते और हमला होने पर अपना बचाव भी नहीं कर पाते. बीते दिनों मसूरी इलाके में एक बच्चे की कुत्तों के काटने के बाद दर्दनाक मौत हो गई. डॉ. विजय पाठक बताते हैं कि बारिश के बाद बढ़ी उमस और गर्मी से कुत्ते भी परेशान रहते हैं. कई आवारा कुत्तों को सुरक्षित और ठंडी जगह नहीं मिल पाती. इसकी वजह से वे चिड़चिड़े और आक्रामक हो सकते हैं.

गाजियाबाद. गली-मोहल्लों में खेलते बच्चे, पार्कों में दौड़ते मासूम और सड़क किनारे झुंड में बैठे आवारा कुत्ते. बारिश के बाद बदले मौसम में गाजियाबाद की यह तस्वीर चिंता बढ़ा रही है. शहर के सरकारी अस्पतालों में रोजाना 300 से अधिक लोग कुत्ते के काटने के बाद पहुंच रहे हैं. सबसे ज्यादा चिंता छोटे बच्चों को लेकर है क्योंकि वे खतरे को ठीक से समझ नहीं पाते और हमला होने पर अपना बचाव भी नहीं कर पाते. बीते दिनों गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र में चार वर्षीय बच्चे की कुत्तों के काटने के बाद हुई मौत ने इस खतरे की गंभीरता सामने ला दी है. बारिश और उमस में कुत्ते ज्यादा आक्रामक क्यों होते हैं. लोकल 18 से गाजियाबाद के पशु चिकित्सक डॉ. विजय पाठक बताते हैं कि इस समय फीमेल डॉग्स का हीट पीरियड (पशुओं में प्रजनन का समय) चल रहा होता है. इस दौरान उनके व्यवहार में बदलाव आता है और ज्यादा आक्रामक हो सकती हैं. डॉ. विजय पाठक के मुताबिक, बारिश के बाद बढ़ी उमस और गर्मी से कुत्ते भी परेशान रहते हैं. कई आवारा कुत्तों को सुरक्षित और ठंडी जगह नहीं मिल पाती जिसके कारण वे चिड़चिड़े और आक्रामक हो सकते हैं.

बच्चों को समझाएं ये बात

डॉ. विजय पाठक बताते हैं कि इस मौसम में छोटे बच्चों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है. हाल ही में गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र में चार साल के मासूम पर कुत्ते ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था. बच्चे की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. डॉ. विजय पाठक कहते हैं कि छोटे बच्चे कुत्तों के लिए आसान टारगेट बन सकते हैं क्योंकि वे तेज भागकर अपना बचाव नहीं कर पाते और कई बार डर के कारण गलत प्रतिक्रिया भी देते हैं. माता-पिता को बच्चों को कुत्तों से छेड़छाड़ नहीं करने की सीख देनी चाहिए. कई बार बच्चे कुत्तों को पत्थर मारते हैं उनके पीछे भागते हैं या उन्हें परेशान करते हैं, ऐसी स्थिति में कुत्ता खुद को खतरे में महसूस कर हमला कर सकता है. पार्क, कॉलोनी या सड़क पर छोटे बच्चों को अकेला खेलने के लिए नहीं भेजना चाहिए. उनके साथ किसी बड़े का होना जरूरी है.

घाव कितना गहरा ये जानना जरूरी

डॉ. विजय पाठक बताते हैं कि डॉग बाइट के बाद लापरवाही भारी पड़ सकती है. घाव कितना गहरा है और शरीर के किस हिस्से पर काटा गया है, यह महत्वपूर्ण है, लेकिन सबसे बड़ा खतरा रेबीज का होता है. कुत्ते के काटने या पंजे से खरोंच लगने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. डॉक्टर की सलाह के अनुसार, एंटी-रेबीज उपचार पूरा करना चाहिए. समय पर इलाज ही गंभीर खतरे से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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