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Delhi News:नई दिल्ली में 57वां शंकर-शाद मुशायरा 4 अप्रैल 2026 को मॉडर्न स्कूल, बाराखंबा रोड में आयोजित होने जा रहा है. 1954 से चली आ रही यह परंपरा आज भी दिल्ली के सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई है. यह मंच उर्दू शायरी की उस विरासत को जीवित रखता है, जहां पुराने दौर की खुशबू और नए दौर की आवाज़ें एक साथ गूंजती हैं.
नई दिल्ली में 57वां शंकर-शाद मुशायरा 4 अप्रैल 2026 को मॉडर्न स्कूल, बाराखंबा रोड में आयोजित होने जा रहा है. 1954 से चली आ रही यह परंपरा आज भी दिल्ली के सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा बनी हुई है. यह मंच उर्दू शायरी की उस विरासत को जीवित रखता है, जहां पुराने दौर की खुशबू और नए दौर की आवाज़ें एक साथ गूंजती हैं. हर साल की तरह इस बार भी मुशायरा शायरी प्रेमियों के लिए एक खास अनुभव लेकर आ रहा है.
शंकर लाल मुरलीधर मेमोरियल सोसाइटी द्वारा आयोजित यह मुशायरा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि तहजीब और अदब का उत्सव है. डिजिटल दौर में जहां कंटेंट क्षणिक हो गया है, वहीं यहां पढ़े जाने वाले अशआर लोगों के दिलों में लंबे समय तक बस जाते हैं. यह मंच शास्त्रीयता और आधुनिक सोच के खूबसूरत मेल को दर्शाता है, जो इसे खास बनाता है.
इस बार मुशायरे में मशहूर शायर वसीम बरेलवी और जावेद अख्तर जैसे बड़े नाम शिरकत करेंगे. इनके साथ शीन काफ़ निज़ाम, इक़बाल अश्हर, राजेश रेड्डी और शकील आज़मी जैसे अनुभवी शायर भी मंच पर अपने अशआर से समा बांधेंगे। दिग्गजों की मौजूदगी इस आयोजन को और भी खास बना रही है.
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मुशायरे में नई पीढ़ी के शायर भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. चरण सिंह बशर, अज़हर इक़बाल, हीना हैदर रिज़वी और जुबैर अली ताबिश जैसे युवा शायर अपनी नई सोच और ऊर्जा के साथ दर्शकों से जुड़ेंगे. यह मंच युवाओं को अपनी बात कहने और पहचान बनाने का बेहतरीन मौका देता है.
इस वर्ष द्वितीय शंकर-शाद शायरी कॉन्टेस्ट के जरिए देशभर की नई प्रतिभाओं को मंच तक पहुंचने का अवसर दिया गया है. लिखित और वीडियो एंट्री के माध्यम से चुने गए विजेताओं की घोषणा 4 अप्रैल को इसी मंच पर की जाएगी. यह पहल उभरते शायरों के लिए एक बड़ी शुरुआत साबित हो रही है.
आज की युवा पीढ़ी, खासकर जेन-ज़ी, शंकर-शाद मुशायरे से गहराई से जुड़ रही है. यह मंच मानसिक स्वास्थ्य, पहचान और भावनाओं जैसे जटिल विषयों को व्यक्त करने का माध्यम बन चुका है. साथ ही, इस बार महिला शायरों की मजबूत भागीदारी और हिंदी-हिंदुस्तानी के समावेश के साथ यह आयोजन अपनी विविधता को भी दर्शाता है. यहां खामोशी भी उतनी ही अहम होती है, जितने अल्फ़ाज़.खास बात यह है कि यह मुशायरा सभी के लिए फ्री एंट्री के साथ आयोजित हो रहा है ताकि सभी लोग इस मुशायरे का लुफ्त उठा सके और अगर आप भी शेरो शायरी के शौकीन है तो दिल्ली में आयोजित होने वाले इस मुशायरे में जरूर शामिल हो.
