Last Updated:
डॉ. तरुण सिंह बताते हैं कि आजकल अधिकांश खाद्य पदार्थों में आर्टिफिशियल या एडेड शुगर का इस्तेमाल बढ़ गया है, जो सेहत के लिए हानिकारक है. खासकर छोटे बच्चों के लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है. उनका कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी तरह की आर्टिफिशियल चीनी नहीं देनी चाहिए.
दिल्ली: आज के समय में ‘कितनी चीनी खानी चाहिए’ यह सवाल हर उम्र के लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है. पहले जहां यह चिंता केवल बुजुर्गों तक सीमित थी, वहीं अब बच्चों के माता-पिता भी इस पर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं. दिल्ली के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह के अनुसार, बदलती जीवनशैली और बढ़ते आर्टिफिशियल शुगर के सेवन के कारण बच्चों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है, इसलिए इस विषय पर जागरूकता जरूरी है.
2 साल से कम उम्र के बच्चों को न दें चीनी
डॉ. तरुण सिंह बताते हैं कि आजकल अधिकांश खाद्य पदार्थों में आर्टिफिशियल या एडेड शुगर का इस्तेमाल बढ़ गया है, जो सेहत के लिए हानिकारक है. खासकर छोटे बच्चों के लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है. उनका कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी तरह की आर्टिफिशियल चीनी नहीं देनी चाहिए. इस उम्र में बच्चे का दिमाग तेजी से विकसित होता है और ऐसे में शुगर का अधिक सेवन उसके मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है.
2 से 18 साल तक के बच्चों के लिए सीमित मात्रा जरूरी
डॉ. सिंह के अनुसार, 2 से 18 वर्ष के बच्चों में भी चीनी के सेवन को नियंत्रित करना जरूरी है. उन्हें दिनभर में 25 ग्राम से अधिक एडेड शुगर नहीं लेनी चाहिए. यहां एडेड शुगर का मतलब उन सभी मीठी चीजों से है, जिनमें बाहर से चीनी मिलाई जाती है या पहले से मौजूद होती है.
मीठे के लिए फल बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर बच्चों को मीठा खाने की इच्छा हो, तो उन्हें आर्टिफिशियल शुगर वाले खाद्य पदार्थ देने के बजाय फल देना बेहतर विकल्प है. फलों से बच्चों को प्राकृतिक मिठास के साथ फाइबर और जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं, जो उनके संपूर्ण विकास में मदद करते हैं. तो अगर आपका बच्चा भी ज्यादा चीनी, चॉकलेट या मिठाइयां खाता है तो सावधान हो जाएं.
