मध्य प्रदेश पर 55,000 करोड़ रुपए का कर्ज! क्या CM शिवराज और कमलनाथ की 'फ्री स्कीम' की लड़ाई को झेल पाएगा राज्य?

भोपाल. मध्य प्रदेश में साल के अंत में होने वाले चुनाव से पहले ‘मुफ्त योजनाओं को लेकर किए जाने वाले दावे’ तेज हो गए है, शिवराज सिंह चौहान सरकार महिलाओं के लिए मासिक भुगतान बढ़ाने के साथ ही एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी दे रही है. इस बीच, कांग्रेस के कमलनाथ ने मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने अब तक के ‘पांच वादों’ को ’11 वचन’ तक बढ़ा दिया है.

यह उस राज्य में हो रहा है, जिसका 2023-24 के लिए राजकोषीय घाटा 55,708 करोड़ रुपए का लक्ष्य है, जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का लगभग 4% है. यह राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के अनुसार 3.5% की सीमा से अधिक है.

राज्य सरकार ने जून में ‘सीएम लाडली बहना योजना’ शुरू की थी जिसके तहत राज्य की महिलाओं को मासिक 1,250 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है. मुख्यमंत्री चौहान द्वारा मासिक भुगतान 1,000 रुपए से बढ़ाकर 1,250 रुपए करने के बाद इस महीने यह राशि बढ़ाकर 1,600 करोड़ रुपए कर दी गई है.

यदि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार इस योजना को अंततः 3,000 रुपए प्रति माह तक बढ़ा दिया जाता है, तो योजना के तहत कुल भुगतान बढ़कर 3,800 करोड़ रुपए प्रति माह या 45,600 करोड़ रुपए प्रति वर्ष हो सकता है – जो राज्य के वार्षिक वित्तीय घाटे के करीब है. चौहान ने यह भी घोषणा की है कि सावन के महीने में महिलाओं को रसोई गैस सिलेंडर 450 रुपए के रियायती कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा और भविष्य में ‘उचित व्यवस्था’ की जाएगी. एक गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 1,100 रुपए है और राज्य बाकी लागत वहन करेगा.

कमलनाथ का काउंटर
अगर इस साल के अंत में कमलनाथ सत्ता में आते हैं तो राज्य की वित्तीय स्थिति में बहुत सुधार होने की उम्मीद नहीं है, जिन्होंने जनता से पांच नहीं, बल्कि 11 वादे किए हैं. उनमें से मुख्य हैं महिलाओं को 1,500 रुपए का मासिक भुगतान, इसका मतलब राज्य के खजाने पर प्रति माह 1,875 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ सकता है. दूसरा बड़ा वादा 500 रुपए प्रति माह में एक सिलेंडर देने का है, यानी मौजूदा कीमतों पर राज्य सिलेंडर की लागत का लगभग 600 रुपए वहन करेगा. उन्होंने 100 यूनिट मुफ्त बिजली और अगली 100 यूनिट 50% कीमत पर देने का भी वादा किया है.

इसका मुकाबला करने के लिए, सीएम शिवराज ने रविवार को बिजली दरों में छूट की भी घोषणा की और कहा कि पुराने लंबित बिलों का निपटान मामूली लागत पर किया जाएगा. कमलनाथ के अन्य वादे, जिनके सत्ता में आने पर काफी वित्तीय प्रभाव पड़ सकते हैं, उनमें कृषि ऋण माफी, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और कुछ किसानों को मुफ्त बिजली शामिल है.

इससे राजकोष पर कुल राजकोषीय बोझ वर्तमान सरकार की तुलना में कहीं अधिक बढ़ सकता है. कमलनाथ द्वारा किए गए अन्य वादों में अन्य पिछड़ी जातियों के लिए 27% आरक्षण, जाति जनगणना और सिंचाई के लिए 12 घंटे की सुनिश्चित बिजली शामिल है. आने वाले दिनों में चुनाव तक मध्य प्रदेश में लुभावने वादों की जंग और तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि सभी एक-दूसरे से ऊपर होना चाहते हैं.

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