O-Zone पर दिल्ली में शुरू हुआ सियासी संग्राम! 94 कॉलोनियों पर मंडराया बुलडोजर का साया, 15 लाख परिवारों की उड़ी नींद

O-Zone Vivad: दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र यानी ओ-जोन (O-Zone) विवाद ने 15 लाख से अधिक परिवारों की बेचैनी बढ़ा दी है. राजधानी के गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर, सोनिया विहार, जगतपुर, वजीराबाद और कई अन्य इलाकों में ओ-जोन के बोर्ड लगाए जाने के बाद लाखों लोग डर के साए में आ गए हैं. लोगों को डर है कि कहीं डीडीए की कार्रवाई उनके मकानों तक न पहुंच जाए. यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ अदालतों और सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच चुका है.

ओ-जोन दरअसल यमुना के फ्लडप्लेन क्षेत्र को कहा जाता है, जिसे पर्यावरण की नजरिए से बेहद संवेदनशील माना गया है. दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत वजीराबाद से ओखला तक करीब 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र को ओ-जोन घोषित किया गया था. इस इलाके में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध है, क्योंकि यह क्षेत्र बाढ़ के दौरान पानी को समाहित करने और ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन वर्षों के दौरान यहां दर्जनों कॉलोनियां और पुराने गांव बस गए, जहां आज लाखों लोग रहते हैं.

विवाद अब इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि एक तरफ डीडीए यमुना के फ्लडप्लेन को अतिक्रमण मुक्त रखने की बात कह रहा है. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार इन्हीं इलाकों में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाएं शुरू कर रही है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में साफ किया है कि पुराने मकानों और पहले से बसी कॉलोनियों पर कोई बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी. इसके बावजूद इलाके में फैले भ्रम और नोटिसों की वजह से लोग डरे हुए हैं. करीब 91 से 94 कॉलोनियों और लगभग 15 लाख लोगों से जुड़े इस विवाद ने अब दिल्ली की राजनीति में नया मोर्चा खोल दिया है.

क्या है ओ-जोन और क्यों बनाया गया?

ओ-जोन यमुना नदी के फ्लडप्लेन क्षेत्र को दिया गया नाम है. दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत वजीराबाद से ओखला तक करीब 165 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इस श्रेणी में रखा गया था. इसका मुख्य उद्देश्य यमुना के बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित करना, ग्राउंड वॉटर रिचार्ज को बेहतर करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है. नियमों के अनुसार यहां नए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है. लेकिन समय के साथ यहां बड़ी आबादी बस गई, जिससे पर्यावरणीय नियमों और लोगों की आवासीय जरूरतों के बीच टकराव पैदा हो गया है.

  1. 15 लाख लोगों में क्यों फैला डर?
    गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर, सोनिया विहार, जगतपुर और अन्य इलाकों में O-Zone के बोर्ड लगने के बाद लोगों में यह डर फैल गया कि उनके घरों पर बुलडोजर चल सकता है. डीडीए और अन्य एजेंसियों द्वारा जारी नोटिसों ने उनका डर और बढ़ा दिया है. कई परिवार दशकों से यहां रह रहे हैं, जबकि कुछ गांवों का इतिहास सैकड़ों साल पुराना बताया जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से घर बनाए हैं और अब उन्हें अपने आशियाने के भविष्य की चिंता सता रही है.
  2. ओ-जोन को लेकर डीडीए का रुख?
    दिल्ली हाईकोर्ट और एनजीटी पहले ही यमुना के फ्लडप्लेन से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दे चुके हैं. डीडीए ने भी सार्वजनिक नोटिस जारी कर ओ-जोन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की बात कही है. प्रशासन का तर्क है कि यमुना का बाढ़ क्षेत्र हर साल जलमग्न होता है और यहां अतिक्रमण बढ़ने से बाढ़ और पर्यावरणीय खतरे बढ़ रहे हैं. हालांकि सरकारी बैठकों में यह स्पष्ट किया गया है कि अदालत की चिंता खास तौर पर नए अवैध निर्माणों को लेकर है, न कि वर्षों पुराने मकानों को लेकर.
  3. सरकार और डीडीए के बीच विरोधाभास क्यों?
    स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ओ-जोन क्षेत्र इतना संवेदनशील है तो फिर सरकार यहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य क्यों कर रही है. हाल ही में सोनिया विहार क्षेत्र में करीब 138 करोड़ रुपये की सीवर परियोजना का शिलान्यास किया गया. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी स्पष्ट कहा है कि पुराने मकानों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. ऐसे में एक तरफ विकास कार्य और दूसरी तरफ ओ-जोन बोर्डों के कारण लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है. यही विरोधाभास पूरे विवाद को बड़ा कर रहा है.
  4. राजनीतिक मुद्दा बना ओ-जोन क्षेत्र
    ओ-जोन का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है. बीजेपी सांसद मनोज तिवारी, रामवीर सिंह बिधूड़ी और मंत्री कपिल मिश्रा खुलकर लोगों के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं. दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान भी प्रभावित परिवारों के समर्थन में सामने आए हैं. सभी राजनीतिक दल लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें बेघर नहीं होने दिया जाएगा. ऐसे में पर्यावरण संरक्षण, अदालत के आदेश, सरकारी नीतियां और लाखों लोगों के आवास का सवाल एक साथ जुड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है.

ओ-जोन को लेकर क्‍या कर रहे हैं दिल्‍ली के जनप्रतिनिधि?

जिन कॉलोनियों को 2008 में रेगुलराइज किया गया था, आज उन्हीं कॉलोनियों को ओ-जोन के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है. लगभग 15 लाख परिवार डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं. उन्‍होंने इस मुद्दे को लेकर उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की है. उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं. यदि किसी भी कॉलोनी में बुलडोजर कार्रवाई हुई तो वह सबसे पहले बुलडोजर के सामने खड़े होंगे. ओ-जोन के नियम गांवों की पुरानी आबादी पर लागू नहीं होते और लोगों को डरने की जरूरत नहीं है. – रामवीर सिंह बिधूड़ी, दक्षिण दिल्ली से बीजेपी सांसद

ओ-जोन को लेकर लोगों के बीच गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं. उनके अनुसार यमुना के बांध के सुरक्षित हिस्से में स्थित कई कॉलोनियों को गलत तरीके से ओ-जोन में दिखाया गया है. एलजी, मुख्यमंत्री और विभिन्न विभागों के साथ बैठकों में यह तय किया गया है कि ऐसी गलतियों को ठीक किया जाएगा और अदालत को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाएगा. फिलहाल ओ-जोन के नाम पर कार्रवाई रोक दी गई है. आम आदमी पार्टी के नेता राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. मनोज तिवारी, पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद

ओ-जोन के बोर्डों को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. बने हुए घरों की एक ईंट पर भी कोई हाथ नहीं लगा सकता. दिल्ली सरकार क्षेत्र के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी परिवार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. विपक्षी दल लोगों के बीच डर और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. क्षेत्र के निवासियों को अफवाहों की बजाय सरकार की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए. – कपिल मिश्रा, मंत्री, दिल्ली सरकार

डीडीए को इस मामले में मानवीय और व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए. दिल्ली में लाखों परिवार ऐसे मकानों में रह रहे हैं जहां जरूरत के हिसाब से छोटे-मोटे निर्माण किए गए हैं. ऐसे मामलों में सीधे बुलडोजर कार्रवाई की बजाय एमनेस्टी स्कीम या कंपाउंडिंग फीस के जरिए समाधान निकाला जा सकता है. सरकार और डीडीए लोगों के आशियानों को बचाने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाए. इस मुद्दे पर वह दिल्ली की जनता के साथ खड़े हैं और किसी भी परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाना चाहिए. – अमानतुल्लाह खान, आम आदमी पार्टी के विधायक

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